राजनीतिक खबर - एक तरफ भाजपा हर सीट पर नरेन्द्र मोदी को प्रत्याशी बताकर अपनी लोकसभा की नैया पार करना चाहती हैं वहीं दूसरी ओर प्रत्याशी चयन में पसीने छूट रहे हैं । मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को नहीं फायर ब्रांड और युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को टारगेट किया था, इतना ही नहीं बाकायदा पार्टी ने सिंधिया को सामन्तवाद बताकर "माफ करो महाराज" कहकर प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हाहाकार मचा रखी थी नतीजन ज्योतिरादित्य सिंधिया की लोकप्रियता बढ़ती गई और सूबे में जोड़ तोड़ कर कांग्रेस की सरकार बन गई ।
अब एक बार फिर लोकसभा चुनाव में भाजपा ग्वालियर चम्बल अंचल की चार सीटों पर सिंधिया का प्रभाव देखते हुए प्रत्याशी चयन में कई मैराथन के बाद भी कोई खास निर्णय नहीं कर सकी है । भिंड आरक्षित सीट से भाजपा ने वर्तमान सांसद डॉ भगीरथ प्रसाद का टिकिट काटकर संध्या राय को प्रत्याशी बनाया है अब प्रबल दावेदार अशोक अर्गल के वगावती स्वर इतने हो गए हैं कि वो लगातार सिंधिया के संपर्क में है और हाथ थामकर भाजपा को मुश्किल में डाल सकते हैं ।
उधर भाजपा ने ग्वालियर से सांसद केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को मुरैना भेजकर तोमर को तो संजीवनी देने का काम किया है लेकिन पार्टी से मुश्किल में डाल दिया है क्योंकि यहाँ वर्तमान संसद अनूप मिश्रा भी नाराज बताए जा रहे हैं और उनके भी कांग्रेस में जाने की अटकलें हैं लेकिन उन्होंने इस बात को सिरे से नकार दिया है, फिर भी मुरैना से टिकिट काटने के बाद मिश्र के नाम को ग्वालियर सीट के पैनल से बाहर रखा गया है ऐसे में तोमर सहित पार्टी को अनूप मिश्रा का अंदरूनी विरोध झेलना पड़ सकता है ।
सिंधिया गुना से सांसद हैं तो उनकी पत्नी को लेकर चर्चा है कि वे ग्वालियर से चुनाव लड़ सकती हैं और पार्टी अभी इस निर्णय पर नहीं पहुंची है लेकिन कांग्रेस पार्टी की कशमकश ने भाजपा की नींद छीन ली है, गुना में पार्टी ने अब तक सारे प्रयोग करके देख लिए लेकिन सिंधिया अजेय ही रहे और भाजपा उनके किले में सेंध नहीं लगा सकी नतीजन आज भाजपा पार्टी को उनके खिलाफ उम्मीदवार ही नहीं मिल रहा है जो भाजपा के लिए खिवैया साबित हो सके । सिंधिया या उनकी पत्नी के कारण ही भाजपा ग्वालियर सीट को होल्ड पर रखे हैं यही हालत यहाँ पर है क्योंकि यहाँ भी वो सभी लंगड़े घोड़े हैं जो विधानसभा चुनाव में मात खा चुके हैं ।भाजपा गुना और ग्वालियर को लेकर असमंजस की स्थिति में है उसे जिताऊ उम्मीदवार की तलाश है लेकिन सिंधिया का नाम सुन भाजपा प्रत्याशी पर मंथन नए सिरे से शुरू हो जाता है ।
अब एक बार फिर लोकसभा चुनाव में भाजपा ग्वालियर चम्बल अंचल की चार सीटों पर सिंधिया का प्रभाव देखते हुए प्रत्याशी चयन में कई मैराथन के बाद भी कोई खास निर्णय नहीं कर सकी है । भिंड आरक्षित सीट से भाजपा ने वर्तमान सांसद डॉ भगीरथ प्रसाद का टिकिट काटकर संध्या राय को प्रत्याशी बनाया है अब प्रबल दावेदार अशोक अर्गल के वगावती स्वर इतने हो गए हैं कि वो लगातार सिंधिया के संपर्क में है और हाथ थामकर भाजपा को मुश्किल में डाल सकते हैं ।
उधर भाजपा ने ग्वालियर से सांसद केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को मुरैना भेजकर तोमर को तो संजीवनी देने का काम किया है लेकिन पार्टी से मुश्किल में डाल दिया है क्योंकि यहाँ वर्तमान संसद अनूप मिश्रा भी नाराज बताए जा रहे हैं और उनके भी कांग्रेस में जाने की अटकलें हैं लेकिन उन्होंने इस बात को सिरे से नकार दिया है, फिर भी मुरैना से टिकिट काटने के बाद मिश्र के नाम को ग्वालियर सीट के पैनल से बाहर रखा गया है ऐसे में तोमर सहित पार्टी को अनूप मिश्रा का अंदरूनी विरोध झेलना पड़ सकता है ।
सिंधिया गुना से सांसद हैं तो उनकी पत्नी को लेकर चर्चा है कि वे ग्वालियर से चुनाव लड़ सकती हैं और पार्टी अभी इस निर्णय पर नहीं पहुंची है लेकिन कांग्रेस पार्टी की कशमकश ने भाजपा की नींद छीन ली है, गुना में पार्टी ने अब तक सारे प्रयोग करके देख लिए लेकिन सिंधिया अजेय ही रहे और भाजपा उनके किले में सेंध नहीं लगा सकी नतीजन आज भाजपा पार्टी को उनके खिलाफ उम्मीदवार ही नहीं मिल रहा है जो भाजपा के लिए खिवैया साबित हो सके । सिंधिया या उनकी पत्नी के कारण ही भाजपा ग्वालियर सीट को होल्ड पर रखे हैं यही हालत यहाँ पर है क्योंकि यहाँ भी वो सभी लंगड़े घोड़े हैं जो विधानसभा चुनाव में मात खा चुके हैं ।भाजपा गुना और ग्वालियर को लेकर असमंजस की स्थिति में है उसे जिताऊ उम्मीदवार की तलाश है लेकिन सिंधिया का नाम सुन भाजपा प्रत्याशी पर मंथन नए सिरे से शुरू हो जाता है ।
