बाजारवाद से ग्रस्त समय में मुनिश्री की कविताएं जीवन जीने का तरीका सिखाती हैं : शरद सिंह



सागर-मुनि श्री  क्षमासागर जी महाराज  की कविताएं अनंत यात्रा की ओर ले जाती हैं। उनके काव्य में प्रकृति के तदर्थ दर्शन नहीं बल्कि दर्शन के तदर्थ प्रकृति है। प्रकृति के संरक्षण और प्रकृति से शिक्षण दोनों की बात वे एक साथ, एक स्वर में करते हैं। वे सिद्ध कर देते हैं कि प्रकृति हो या प्रतिकृति दोनों के मूल में है जीवन दर्शन। जो जीने का तरीका सिखाता है और उसके आगे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। आज के बाजारवाद से ग्रस्त समय में मुनिश्री की कविताएं जीवन जीने का तरीका सिखाती हैं। यह बात मुख्य अतिथि डॉ. शरद सिंह ने मुनिश्री क्षमासागर के पांचवें समाधि दिवस पर बुधवार को मैत्री समूह द्वारा रवींद्र भवन में आयोजित मुनिश्री क्षमासागर जी महाराज की कविताओं पर काव्य विमर्श कार्यक्रम में कही।
अध्यक्षता कर रहे रीवा विवि के पूर्व कुलपति प्रो. उदयचंद जैन ने कहा कि मुनिश्री की काव्य रचनाएं जीवन की प्रमुख घटनाओं से प्रेरित है। उनकी काव्य रचनाएं मनुष्य के कल्याण के साथ ही प्रकृति, पर्यावरण, कला और पशु-पक्षियों पर भी लिखी गई हैं। जो कि समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।
पूर्व के काल में जो भी लिखा वह लोगों के हृदय में आज भी है, वर्तमान में ऐसा लेखन नहीं हो रहा : प्रो. कदंब
प्रमुख वक्ता खंडवा से आए प्रो. प्रतापराव कदंब ने मुनि क्षमा सागर की कविताओं पर विमर्श किया। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि भक्ति काल से लेकर पूर्व के कालों में जो भी साहित्यकार और कवि रहे चाहे उनमें कबीर हों, महर्षि वाल्मीकि या महाकवि तुलसीदास, उन्होंने जो भी रचा उसे लोग आत्मसात कर लेते थे। लोगों के हृदय वह आज भी संप्रेषित होता है। परंतु आज जो लिखा जा रहा है, वह आध्यात्म और अन्य विषयों में लिखने के बाद भी संप्रेषित नहीं हो पा रहा है। मुनिश्री संवेदना को जीवन के तौर सुरक्षित रखना चाहते थे। वर्तमान में संवेदना र ही संकट है। अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. जीवनलाल जैन ने मुनिश्री के संस्मरण और अपने अनुभव सुनाए। निर्मलचंद निर्मल भी बतौर अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम में डॉ. महेश तिवारी, उमाकांत मिश्रा, वीरेंद्र प्रधान, हेमचंद जैन, हरि सिंह ठाकुर, आरके तिवारी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान युवाओं ने पेंटिंग भी बनाई।
समाधि स्थल पर प्रार्थना, मोराजी में भजन संध्या, अंकुर कॉलोनी में कॅरिअर काउंसिलिंग का आयोजन
मुनिश्री के समाधि दिवस पर सुबह भाग्योदय तीर्थ के पास स्थित समाधि स्थल पर प्रार्थना हुई। डॉ. राकेश जैन ने मुनिश्री के साथ अपनी सहभागिता से संबंधित अनुभव साझा किए। ब्रह्मचारी समता दीदी इंदौर ने उन्हें श्रेष्ठ साधक बताया। वर्णी भवन मोराजी में मुनिश्री क्षमासागर, जी महाराज एवं आर्यिका विजयश्री माताजी के समाधि दिवस पर विधान का आयोजन किया गया। यहां रात में भजन संध्या भी हुई। वहीं अंकुर कॉलोनी स्थित क्षमासागर छात्रावास में रात को कॅरिअर काउंसिलिंग का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि अभिषेक भार्गव थे। ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑफिसर तरुण सिंह और अजय व्यास ने युवाओं को कॅरिअर से जुड़ी जानकारी दी।
      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.