शिवपुरी- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 4 योजना के पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न से वंचित करने पर संबंधित संस्था एवं अधिकारी से डेढ़ गुना राशि संबंधित हितग्राही के खाते में जमा करानी होगी। उक्त आशय की जानकारी आज राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष राजकिशोर स्वाई ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना, पूरक पोषण आहार कार्यक्रम, मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की समीक्षा एवं मूल्यांकन की समीक्षा बैठक के दौरान दी।
जिलाधीश कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में आयोग के सदस्य श्रीमती स्नेहलता उपाध्याय एवं किशोर खण्डेलवाल, प्रशासकीय अधिकारी अनिल तिवारी, विधायक कोलारस वीरेन्द्र रघुवंशी, जनपद अध्यक्ष शिवपुरी पारम सिंह रावत, जनपद अध्यक्ष नरवर मुकेश खटीक, अपर कलेक्टर अशोक कुमार चौहान, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एच.पी.वर्मा, जनप्रतिनिधि सहित योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित विभागों के जिला एवं विकासखण्ड, परियोजना स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री राजकिशोर स्वाई ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार ने 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम पारित किया है, जिसके तहत गरीबों को खाद्यान्न देना उनका कानूनी अधिकार हो गया है। इस अधिनियम में किसी भी प्रकार का अवरोध पैदा करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत 4 योजनाओं को शामिल किया गया है। इन चार योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न से वंचित रखने पर संबंधित संस्था एवं अधिकारी से उपार्जन दर से डेढ़ गुना राशि बसूल कर हितग्राही के खाते में जमा कराई जाएगी।
उन्होनें बताया कि पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न प्राप्त हो, इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सरपंच की अध्यक्षता में और नगरीय क्षेत्रों में पार्षद की अध्यक्षता में निगरानी समितियों का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक राज्य में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत खाद्य आयोग का गठन किया गया है। इसका मुख्य कार्य अधिनियम का बेहतर क्रियान्वयन हो, इसके लिए आयोग प्रदेश के विभिन्न जिलों का भ्रमण कर लोगों से चर्चा कर जानकारी ले रहा है। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत चार योजनाओं को शामिल किया गया है।
उन्होंने उपस्थित जनप्रतिनिधियों से कहा कि अधिनियम के क्रियान्वयन में वे भी अपना पूर्ण सहयोग दें और सुझाव दें। इस अधिनियम के तहत 23 कैटिगिरी को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को जो एक रूपए किलों गेहूं प्रदाय किया जा रहा है उसके उपार्जन पर शासन को 40 रूपए खर्च करने पड़ते है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में सभी प्रकार के खाद्यान्न 1 रूपए प्रति किलों एवं नमक भी एक रूपए प्रति किलों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैठक के माध्यम से अधिनियम के बेहतर क्रियान्वयन हेतु जो सुझाव प्राप्त होंगे। उन्हें राज्य सरकार को अवगत कराया जाएगा। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिनियम के बेहतर क्रियान्वयन हेतु एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को आने वाली विभिन्न समस्याओं से भी अवगत कराया।
