बावनगजा-कैंची चलाते समय कैंची सीधी चलती है और अपने रास्ते में आने वाली हर वस्तु को दो हिस्सों में बांट देती है। वहीं सुई धीरे-धीरे उसी कटे हिस्से को एक साथ जोड़ते चलती है। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन मे कहे उन्होने कहा कई लोगों के व्यवहार में यह देखा जाता है वह हमेशा कैंची की तरह तोड़ने की योजना बनाते रहते हैं। जिससे उनके आसपास नकारात्मक वातावरण विकसित हो जाता है। आदत वहीं अच्छी है जो लोगों में सकारात्मक सोच को विकसित करे।
अष्टानिका पर्व का महत्व बताया मुनि श्री ने
महाराज श्री ने कहा अष्टानिका पर्व एक तीर्थ यात्रा का पर्व है। भगवान महावीर को समर्पित यह पर्व जैन धर्म के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है। आठ दिन का यह पर्व साल में तीन बार मनाया जाता है। जून-जुलाई में, अक्टूबर-नवंबर में या फरवरी-मार्च में। इस पर्व के तहत ही सिद्ध चक्र विधान आयोजित किए जाते है। इस पर्व को किसी तीर्थ स्थान पर जाकर ही मनाना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
अष्टानिका पर्व का महत्व बताया मुनि श्री ने
महाराज श्री ने कहा अष्टानिका पर्व एक तीर्थ यात्रा का पर्व है। भगवान महावीर को समर्पित यह पर्व जैन धर्म के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है। आठ दिन का यह पर्व साल में तीन बार मनाया जाता है। जून-जुलाई में, अक्टूबर-नवंबर में या फरवरी-मार्च में। इस पर्व के तहत ही सिद्ध चक्र विधान आयोजित किए जाते है। इस पर्व को किसी तीर्थ स्थान पर जाकर ही मनाना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
