अरथूना-श्रद्धा भक्ति, समर्पण, सदभावना और विनम्रता के विविध रंगों से सजे संत शिरोमणि प्रवचन माला में रविवार को सफलता प्राप्त करने के मूल मंत्र देते हुए मुनि श्री समता सागरजी महाराज ने कहा कि सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती है कि आपके पास शक्ति का भंडार कितना है। सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप प्राप्त शक्ति का उपयोग कैसे करते हैं। जीवन में धर्म हो या कर्म क्षेत्र, खेल हो या परीक्षा, सफलता का आसमान छूने का एक ही तरीका है कि हम अपनी योग्यता को पहचान कर शक्ति का श्रेष्टतम सदुपयोग करें। श्रेष्टतम सदुपयोग ही सफलता का आधार है। इसलिए शक्ति के दुरूपयोग से बचे। उपयोग स्वयं के लिए और सदुपयोग पर हित के लिए करें। मुनि श्री ने कहा कि शिक्षा और शिक्षक के सम्मान में ही राष्ट्र का गौरव बढ़ेगा। आसमान छूते वृक्ष हो या गगनचुंबी इमारतें हों, जड़ों और बुनियाद का मजबूत होना अनिवार्य है। अर्थात हमें हर समय अच्छे कर्म करते रहना चाहिए। समाज के प्रवक्ता विवेक जैन ने बताया कि दोपहर में मुनि संघ के सानिध्य में तत्वचर्चा हुई। शाम को गुरूभक्ति, आरती और ऐलक श्री निश्चय सागरजी महाराज के मंगल प्रवचन हुए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
