बांसवाड़ा-शहर की बाहुबली कॉलोनी जैन मंदिर में सुभूषणमती माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार में सब चीजें उपहार में मिल सकती है, लेकिन मां और मोक्ष कभी उपहार में नहीं मिलते है। इन्हें पुरुषार्थ से ही प्राप्त किया जा सकता है। जब उस पंचम काल में मन की चंचलता, कषायों की तीव्रता, शरीर अन्न का कीड़ा जैसी अनेक प्रतिकूलताएं है। फिर भी यह मानव जीवन, जैन कुल इन्द्रियों की सिद्धत्व की तैयारी के लिए बाह्य निमित्त आपके पास में है। अंतरंग निमित्त जुटाने का मतलब सिद्धों के गुणों में अनुराग। ध्यान रखें, दूध फट गया तो बेकार हैं। इसलिए दूध फटे उससे पहले जामन लगा दो। इसी प्रकार यह मानव जीवन फटे या खत्म हो उससे पहले श्रद्धा का जामन डाल दो। निश्चयनय और व्यवहार नय की रस्सी से ज्ञान का मक्खन मिलेगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
