सागर-जिस प्रकार हम नक्शा एवं दिशा सूचक यंत्र की सहायता से जल, थल एवं वायु मार्ग से यात्रा करते हैं और अपनी मंजिल पर पहुंच जाते हैं। उसी प्रकार ग्रंथ जिनवाणी हमारा नक्शा एवं गुरु दिशा सूचक यंत्र है। गुरु एवं जिनवाणी के सहारे हम मोक्ष मार्ग पर चलें तभी हमें मुक्ति रूपी मंजिल की प्राप्ति संभव है।
यह बात महावीर दिगंबर जैन मंदिर नेहा नगर मकरोनिया में विराजमान आचार्यश्री निर्भय सागर जी महाराज ने बुधवार को धर्म सभा में कही। उन्होंने कहा कि गाय काली, सफेद भूरी, कैसी भी हो पर वह दूध तो सफेद ही देती है। वैसे ही संत कोई भी हो वह बात तो धर्म, त्याग, वीतरागता की ही करता है। हमें संतवाद, पंथवाद को छोड़कर निर्ग्रंथ हो जाना चाहिए। क्योंकि जब भी मुक्ति मिलेगी हमें निग्रंथ धर्म से ही मिलेगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
