महावीर एक मे अनंत और अनंत मे एक है आचार्य श्री



जबलपुर -महावीर जयन्ती पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा आज के महावीर प्रभु को ऐसे ही अनन्त कालीन महावीर प्रभु को हम समझे। वे एक मे अनन्त और अनन्त मे एक है। उन्होंने कहा यह बड़ी अद्धभुत बात है। जब सही सही ज्ञान हो जाता है। तब सुख और दुख अपने आप समाप्त हो जाते है। जब भूख भी नही,प्यास भी नही,अर्जीण भी नही वहाँ पर न तो भोजन का महत्व है न रोग ही नही है तो निरोगता का प्रश्न ही नही रहा।
    प्रकाश डालते हुए आचार्य भगवन ने कहा भगवान महावीर ने कहा न कठोर होना न मृदुल होना है, प्रकृति में एक समान रहना है, यह साधना बताई। वस्तुतः पाठयक्रम तब तक होता है जब तक उसमे हम आत्मसात नही होते अथवा यू  कह दो हमारा जीवन नही बन पाता। गुरुवर ने कहा यह धरती ऐसा मंच रही है, जिसने समय समय पर महान आत्मा को अवतरित किया और संसार के सामने लाकर उत्थान  का मार्ग प्रशस्त किया। ऐसी आत्माओ के सामने मित्र शत्रु का भेद समाप्त हो गया। संयोग वियोग का अर्थ नही रहा। रोक शोक से परे हो गये।
   संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमण्डी

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