महावीरजी-मुख्य मंदिर श्री महावीर जी के त्यागी भवन में विराजमान मुनि श्री युधिष्ठिर सागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्मात्मा प्राणी के लिए विषैला सर्प भी हार बन सकता है, तलवार सुंदर फूलों की माला हो जाती है, विश भी उत्तम औषधि हो जाता है, शत्रु भी मित्र बन जाता है तथा देव प्रसन्नता पूर्वक आज्ञा पालन करने लगते हैं और अधिक तो क्या कहा जाए आचार्य पद्म नंदी स्वामी जी कहते हैं कि जिसके पास धर्म है उसके ऊपर आकाश भी निरंतर रत्नों की वर्षा करता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अमृत का पान करने से पथिक के मार्ग की थकावट दूर हो जाती है और उसे अतिशय आनंद प्राप्त होता है उसी प्रकार इस धर्म उपदेश के सुनने से भव्य जीवों के साथ संसार परिभ्रमण का दुख दूर हो जाता है तथा उन्हें अनंत सुख का लाभ होता है। जैसे अमृत दुर्लभता से प्राप्त होता है उसी प्रकार धर्म का उपदेश भी अत्यंत दुर्लभता से प्राप्त होता है अतः मनुष्य जीवन में धर्म की छत्रछाया में सदा धार्मिक प्रवृत्ति बना कर अपनी आत्मा का उत्थान करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मुनि श्री से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में जैन श्रद्धालु उपस्थित थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
