मूर्खता में कल्याण.........मूर्ख दिवस पर विशेष




राजकुमार शर्मा -मूर्खता कल तक धिक्कारने योग्य उपमा थी लेकिन समय के साथ-साथ सब बदल गया। अब मूर्खता में ही कल्याण है। कल्याणपुर रेत खदान पर जो कुछ जिस अंदाज में चल रहा है उसे नकराने और सही साबित करने में जिम्मेदार जिस तरह की योग्यता दिखा रहे हैं वह निसंदेह मूर्खता ही है। क्या है मूर्खता है? कहां-कहां है मूर्खता! जवाब यह है कि मूर्खता सर्व व्यापी है और हद यह है कि आज मूर्ख दिवस है  इस दिवस को मनाने से पहले ही मूर्खता का प्रवेश सब जगह हो गया है। आज मूर्खता भी योग्यता है। मूर्ख बने रहना भी प्रतिभा है। मूर्ख को मूर्ख न मानने की मूर्खता भी बड़ी अकलमंदी है। मूर्खता से कोई क्षेत्र बचा नहीं है प्रशासन में, राजनीति में, समाज में और समाज के हर जिम्मेदार वर्ग में जिनमें अभिभाषक और पत्रकार भी आते हैं मूर्खता प्रवेश कर चुकी है। तो मूर्ख दिवस पर गर्व के साथ लिखा जा रहा है कि मूर्खता कोई श्राप नहीं है यह स्वअर्जित भी हैं और..। आज तो मूर्खता की स्थिति यह है कि अगर आप मूर्ख है तो आपको अनुदान भी मिल सकता है कल्याणपुर की रेत खदान इस मामले प्रमाण हो सकती है जो बटौना सिर्फ इसी शर्त पर बांट रही है कि आप...?अगर हां तो आप मासिक बंधी के हकदार हैं अगर आप सवाल उठाते हैं और कहते हैं कि अगर पंचायत कल्याणपुर की रेत खदान चला रही हैं तो वेनामी खदान माफिया वहां क्या कर रहा है? अगर आप पूछते हैं कि कल्याणपुर खदान पर जब मीडिया पहुंची तो उसे धमकी देने वाले सरपंच सचिव के आदमी थे या खदान माफिया के काले साम्राज्य की नजीर? अगर आप पूंछते हैं कि वन विभाग के बैरियर और नाके डम्फर चालकों से बसूली हर डम्फर से हर चक्कर पर क्यों कर रहे हैं तो आप की मूर्खता संदिग्ध है आपको यह भी नहीं पूंछना चाहिए कि करैरा, अमोला, सिरसौद, देहात और फिजीकल की पुलिस को कल्याणपुर खदान से निकलने वाले डम्फर क्या कुछ देते हैं? कल्याणपुर की पंचायत का सीईओ कभी सरपंच और सचिव की माली स्थिति पर गौर करता है? क्या राजस्व विभाग के प्रमुख यह देखते हैं कि कल्याणपुर खदान से राजस्व की स्थिति क्या है? क्या वन विभाग यह देखता हैं कि वलारी मैया वन क्षेत्र पर जो नियम लागू होते हैं क्या वह नियम कल्याणपुर रेत खदान पर लागू नहीं होते। खासकर तब जब वन विभाग का बैरियर डम्फरों से शुल्क बसूलता है बहरहाल कल्याणपुर के परिपेक्ष में मूर्ख दिवस पर यह लिखना बड़ा प्रासंगिक है कि अगर किसी को अनुदान प्राप्त नहीं हो रहा तो वह अपने इस हक के लिए बकायदा याचिका दायर कर सकता है और अगर आप याचिका दायर कर ही देते हैं तो आपको इसे अलग से प्रमाणित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। एक क्षेत्र विशेष में मूर्खता के लिए निम्न लाईनें लिखी जा रही है। मतदाताओं से नकारा गया नेता जब यह पूछता है कि मुझे बताओ मेरी गलती क्या है? तो बताओ उत्तर में इसे क्या कहेंगे! कहना सुनना बेमानी है। मौजू यह है कि आज मूर्ख दिवस हैं आपको अगर आप मूर्ख है तो मूर्ख दिवस की बहुत-बहुत बधाई। मूर्खता में ही कल्याण है और कल्याणपुर की रेत खदान इसका बड़ा प्रमाण है। आपको पुन: बहुत-बहुत बधाई।

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