कल्याणपुर की रॉयल्टी बंद, तहसीलदार ने पकड़े पांच डम्फर



रामकुमार शर्मा,लालू शर्मा शिवपुरी -भयांकर भ्रष्टाचार और बेनामी खदान माफिया की नजीर बने कल्याणपुर रेत खदान पर रायल्टी कटना बंद हो गई है। माईनिंग विभाग ने कल्याणपुर की रॉयल्टी न काटने के निर्देश पंचायत को दो टूक अंदाज में दे डाले हैं। मूर्ख दिवस (1 अप्रैल) से आज तक एक भी रॉयल्टी कल्याणपुर रेत खदान से नहीं काटी गई है। रॉयल्टी न काटने की जो बजह सामने आई हैं उसमें विश्वसनीय सूत्रों ने दावा किया है कि मीडिया में निम्न सनसनी खेज तथ्य उजागर हो जाने के बाद पंचायत और माईनिंग विभाग आमने सामने आ गए। माईनिंग विभाग ने पंचायत से पूछा कि गिने चुने माह में 45 हजार घनफुट रेता कैसे निकाली? कहां खफाई? जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो माईनिंग विभाग ने पंचायत के जिम्मेदारों को लताड़ते हुए पूछा कि इतनी बड़ी मात्रा में रॉयल्टी कैसे काटी? जवाब में जो सुनने को मिला उससे माईनिंग विभाग की फूक सरक गई। बताया गया कि हमने काटी हैं क्या? पैसा हम पर आया है क्या? ई रॉयल्टी हैं जिसने काटी है उससे सवाल जवाब करो? जब धड़ल्ले से रॉयल्टी कट रही थी तब आपने क्यों आंख मीच रखी थी! इन जवाबों से पसीना-पसीना हुए माईनिंग विभाग ने तत्काल रॉयल्टी न काटने का हुकुम रॉयल्टी काटने वाले को दे डाला। जो रॉयल्टी काट रहा था उसके माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई क्योंकि वह कल्याणपुर का तकरीबन 50 प्रतिशत रेत करोबार रॉयल्टी की दम पर ही कर रहा था और भ्रष्ट व्यवस्था में बड़ा तुर्रा यह था कि 8.50 रूपए  ई रॉयल्टी काट कर डम्फर चालकों से 10 हजार रूपए बसूले जा रहे थे। रॉयल्टी बंद हो गई। अब रेत खदान माफिया के सामने बड़ा सवाल यह था कि डम्फर चालकों को रॉयल्टी कैसे दें? क्या शत प्रतिशत बिना रॉयल्टी के कारोबार शुरू कर दिया जाए? पहले सवाल का जवाब वेनामी रेत खदान माफिया ने ई सिस्टम को आधार बनाकर खोजा और दतिया जिले के बाडगौर पंचायत की रॉयल्टी काटना और उन्हें डम्फर चालकों को थमाना शुरू कर दिया। अभी दूसरे सवाल का जवाब मिला भी नहीं था और व्यवस्था बनी भी नहीं थी कि करैरा तहसीलदार ने अपनी धमक बनाकर पांच रेत डम्फर और दो डस्ट के डम्फर पकड़ लिए। रेत के डम्फरों पर दतिया जिले की बाडगौर पंचायत की रॉयल्टी मिली। बताया जाता है कि रात में ही पंचायत के जिम्मेदारों से बातचीत की गई तो पंचायत के जिम्मेदारों ने आंखें नटेर कर हैरानी जताते हुए बताया कि यहां तो रेत ही नहीं है तो फिर रॉयल्टी कौन काट रहा है? क्यों काट रहा है? इन्हें रोको! नहीं तो हम फंस जायेंगे। पहले दो प्रश्नों के जवाब तो करैरा तहसीलदार और एसडीएम को संभावित तौर पर पता थे! शेष दो प्रश्नों के जवाब जो रॉयल्टी काट रहे थे उन्होंने यह कहकर दे दिए कि अब चुप रहो आगे से रॉयल्टी नहीं काटेंगे। बहरहाल रात में ही रेत खदान माफिया को कथित तौर पर यह जानकारी मिल गई जिससे सक्रिय हुआ खदान माफिया प्रशासन के जिम्मेदारों को अपने राजनैतिक संपर्क और प्रभाव में लेने के लिए सक्रिय हो गया। बताया जाता है कि एक दो दौर की बैठकों के बाद मामला फिर से जम गया हैं। इस जमे मामले में जिम्मेदार निम्न तथ्य से भ्रष्ट व्यवस्था से उत्साहित होकर वे परवाह है कि तकनीक सबकुछ साबित कर सकती है और उसे सामने लाने का बीड़ा मीडिया ने उठा रखा है तो तकनीकी और दस्तावेजी तौर पर उजागर होता रहेगा कल्याणपुर का भ्रष्ट और वेनामी साम्राज्य।
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