माता पिता शिक्षालयों पर रखे नज़र आचार्य गुरुवरअहिंसा की बात करना बच्चो से हिंसा का व्यवहार करना गलत



जबलपुर-शिक्षा के बारे मे हम ध्यान से समझ ले की आज शिक्षा की क्या गति या पद्धति है महत्वपूर्ण है यह जानना इसमे कौन कोन  भागीदार है यह कहना तो जटिल होगा की फिर भी आप लोग समझते होगे कोन कोन भागीदार है? उसमे आप  लोगो का हाथ है या नहीं यह सोचना होगा
विधार्थी विधा के लिये जाता है किन्तु विधालय मे प्रवेश उपरांत उसकी क्या गतिविधि हो रही है ये जानते हुये हम इसमे सुधार लाना पसंद ही नहीं करते अथवा सुधार लायी नहीं सकते ऐसी धारणा बन चुकी है
    दयोदय मे भावो की अभिव्यक्ति करते हुये आचार्य भगवन विधासागर जी महाराज ने कहा ये माता पिता की ज़िम्मेदारी है की वह शिक्षालयों पर नज़र रखे ऐसा इसलिये उंनके बच्चो के भविष्य का सवाल है शिक्षको भी अपनी गरिमा का ध्यान रखना होगा शिक्षा शिक्षण विधार्थी व अभिवावक यह महत्वपूर्ण अवधारणाये है जिन पर राष्ट्र का भविष्य टिका हुआ है
             अहिंसा की बात करना बच्चो से हिंसा का व्यवहार करना गलत
आचार्य श्री ने कहा अहिंसा की बात करना बच्चो से हिंसा करना अनुचित है स्पर्धा हिंसा की पद्धति है यह भारत की पद्धति नहीं है विधा देने की शुरूआत मे स्पर्धा सर्वदा अनुचित है यदि मन या प्रतिभा मे हलचल हो रही है क्षमता कम है ज्यादा बोझ दिया जा रहा है तो यह ठीक नहीं है सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिये
           संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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