भोपाल-मुनिश्री अजित सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान का जन्म कल्याणक सत्य-धर्म का प्रतीक है। मुनिश्री ने कहा कि वर्तमान में मां भी बच्चों को संस्कार देने के मामले में अधिक ध्यान नहीं देती हैं। इसका प्रतिफल है कि बच्चे माता-पिता का कहा नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि भ्रूण हत्या रोकी जाना चाहिए। मेघों की गर्जना सुनकर मयूर मन भी नाच उठता है। उसी प्रकार भक्ति के माहौल में भक्त का मन श्रद्धा, उत्सव और उमंग से भर उठता है।
ऐलक श्री विवेकानंद सागर जी महाराज ने कहा कि गुरु वचनां के माध्यम से अपने जीवन का निर्माण करते हुए निर्वाण की ओर अग्रसर हों। पंच कल्याणक पंच महाव्रतों के प्रतीक हैं। पांच कल्याणकों की व्याख्या करते हुए कहा कि गर्भ कल्याणक अहिंसा धर्म है, इसमें जीव की रक्षा करना सीखना चाहिए। तप दीक्षा कल्याणक अचैर्य महाव्रत का प्रतीक है। ज्ञान कल्याणक ब्रह्मचर्य महाव्रत का और अपिरिग्रह महाव्रत निर्वाण (मोक्ष) कल्याणक का प्रतीक है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
