हमें स्वयं का गुलाम बनना चाहिए मन का गुलाम नहीं : आचार्य कनकनंदीजी



सागवाड़ा-पुनर्वास कॉलोनी में वैज्ञानिक धर्माचार्य कनकनंदी महाराज का पदारोहण दिवस मनाया गया। समाजजनों ने गुरुदेव का पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी। इसके बाद धर्माचार्य ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आध्यात्मिक ज्ञान के कारण विश्वगुरु के परम पद पर रहा है। जीव को स्वयं को नापने के लिए अलौकिक गणित की आवश्यकता होती है, जो केवल आध्यात्म से ही प्राप्त हो सकती है। जीव को परम स्वतंत्रता आध्यात्म से ही मिलती है। संकल्प और विकल्प रहने पर स्थिर मन से आत्म ध्यान की क्रिया प्रारंभ होती है। मन को स्थिर करने के लिए तन, मन और इंद्रियों को संयमित करना आवश्यक है। पवित्र भाव होने पर आत्मा भी पवित्र रहती है। इससे आसपास का वातावरण भी निर्मल और पवित्र होता है। सामाजिक प्रदूषण को पवित्र करना ही धर्म है। हमें स्वयं का गुलाम बनना चाहिए मन का गुलाम नहीं। सम्यक दर्शन धर्म का मूल है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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