दुर्ग-संत विमर्शसागर जी मुनिराज के चतुर्विध संघ के सानिध्य में सकल जैन समाज ने 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जन्म जयंती मनाई। दुर्ग में निकली शोभायात्रा सुमतिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंची। जगह-जगह गुरुदेव के पाद प्रक्षालन व श्रीजी की आरती उतारी गई। इस अवसर पर आचार्य ने प्रवचन में कहा कि प्रभु महावीर ने जगत को सच्ची शांति का मार्ग दिया। आज विश्व में अशांति है, क्योंकि हम महावीर के सिद्धांतों से दूर हो गए। उनके सिद्धांत व्यक्तिपरक नहीं थे, बल्कि समष्टीपरक थे। भगवान महावीर ने पंचशील सिद्धांत दिए। अहिंसा, सत्य, अचैर्य, ब्रह्मचर्य व अपरिग्रह। इन सिद्धाांतों को यदि जीवन में उतार लिया जाए तो आज भी पूरे विश्व में शांति का वातावरण बन सकता है। महावीर का सिद्धांत जीओ और जीने दो यही विश्व शांति का मंत्र है। अहिंसा परमो धर्मः ही सर्वोच्च धर्म है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
