जिसकी जितनी योग्यता उसकी उतनी प्रगति आचार्य श्री

जबलपुर-साधना का क्षेत्र अपने संकल्प पीआर आधारित होता है जों प्रगाढ़ और संकल्पवान होकर आगे बढ़ते  है वे सफलता क वरण करते है संकल्प मे कोई विकल्प नहीं होना चाहिये विकल्प हीन साधना हो तो सार्थक मानी जाती है यह उद्गार आचार्य श्री विधा सागर जी महाराज ने तिलवाराघाट प्रवचन सभा मे कहे उन्होने कहा की कोई भी चाहे वह बूढ़ा हो या जवान रोगी हो या स्वस्थ्य जिसकी जितनी योग्यता होती है उसे उतनी ही प्रगति मिलती है इसी तरह जों साधक होते है वे जितनी साधना करते है उसी के अनुरूप उनका मूल्यांकन होता है
     संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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