राजकुमार शर्मा- विभिन्न धर्मों के विभिन्न तीर्थ हैं जो आदि अनादि काल से श्रद्धा के केन्द्र बने हुए हैं। आजादी के बाद चाचा नेहरू ने कहा कि बड़े-बड़े बांध आधुनिक भारत के तीर्थ होंगे। आज पूरी तरह से भ्रष्ट व्यवस्था और विकराल भ्रष्टाचार को देखकर यह कहना कतई अतिश्योक्ति पूर्ण नहीं होगा कि आने वाले कल में कल्याणपुर रेत खदान पर जो कुछ चल रहा है वह ऐसे ही चलता रहा तो भ्रष्टाचार का तीर्थ कल्याणपुर बनेगा। यहां आने वाले भ्रष्टाचार और उजागर भ्रष्ट व्यवस्था का सच व्यवहारिक तौर पर जान सकेंगे। वह कागज में नदारद वेनामी भू माफिया के प्रत्यक्ष दर्शन भ्रष्टाचार के उपरोक्त तीर्थ स्थान पर कर सकेंगे। उन्हें मौजूदा तीर्थ में यह भी दिखाई देगा कि जिन लोगों को नदी से तसला फावड़े से रेत निकालने का रोजगार पंचायत के कागजों में दिया गया है। दरअसल में वह मौके पर (नदी) पर अदृश्य हैं उनके दर्शन नदी तक पहुंचने वाले रास्ते में चौकीदार के तौर पर किए जा सकते हैं जो अपरिचित व्यक्ति को रोकने और उसकी सूचना बेनामी रेत माफियाओं को देने के बदले में कागज में मजदूर के तौर पर चढ़कर रोजगार पा रहे हैं। भ्रष्टाचार के तीर्थ बनने वाले कल्याणपुर का उपरोक्त के साथ-साथ अन्य चमत्कारिक सच यह भी है कि उपरोक्त तीर्थ स्थान के कई चमत्कारिक प्रभाव है जिनमें गधाई बैरियर पर तैनात वन महकमे के कर्मचारियों की बंद आंखें भी इसका प्रमाण है। बैरियर से सैकड़ों की तादात में रेत भरकर निकल रहे डम्फर भी चमत्कारिक प्रभाव के कारण न तो वन विभाग को दिखाई देते हैं और ना ही माईनिंग विभाग को और ना ही राजस्व एवं पुलिस को। बड़ा चमत्कारिक प्रभाव यह भी है कि जो ई रायल्टी एक हजार रूपए की कटती हैं उसके डम्फर मालिकों से 9 हजार रूपए बसूले जाते हैं नतीजन सस्ती रेता और पंचायत स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की सरकार की मंशा को भी भ्रष्टाचार के तीर्थ बने कल्याणपुर में ठेंगा दिखा दिया जाता है जो रेता ईमानदारी से 11-12 हजार की बिक नी चाहिए वह 19 - 20 हजार रूपए की बिक रही हैं। यह सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार के तीर्थ बने कल्याणपुर के चमत्कारिक प्रभाव ही हैं।
