हनुमान जी जैसी भक्ति जीवन को मोक्षमार्गी बनायेगी पूर्णमति माताजी



बंडा-मंगल धाम मे हनुमान जयंती पर विशेष उद्बोधन देते हुए स्वर कोकिला आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी ने कहा सत्य की रक्षा व प्रभु भक्ति के प्रति प्रबल समर्पण के कारण ही वीर हनुमान जी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के प्रिय बन पाये। उन्होंने कहा हनुमान जी जैसी भक्ति ही जीवन को मोक्षमार्गी बना सकती है। यही मनुष्य का परम ध्येय और लक्ष्य होना चाहिए, क्योकि नर तन बार बार मिलने वाला नही है। श्री हनुमान सत्य के पक्षधर थे उन्होंने कभी असत्य अन्याय का साथ नही दिया। सीता को जब लोकोपवाद के कारण जब श्री राम ने जंगल मे भेजा तो तब हनुमान जी ने सीता का साथ दिया और श्री राम का विरोध किया, ऐसे थे श्री हनुमान श्री हनुमान लोह पुरुष थे, उनका शरीर व्रज के समान था, इसलिये उन्हे बजरंगबली कहकर पुकारते है।
   आर्यिका श्री ने कहा जैन दर्शन मे हनुमान जी का बड़ा महत्व हैं भले ही जैन दर्शन व हिन्दू संस्क्रति मे हनुमान जी के जीवन चरित्र को अलग अलग तरीके से माना व समझा गया है लेकिन मूल रूप से हनुमान जी भक्ति मे श्रद्धा, समर्पण, संयम, त्याग सत्य की रक्षा को प्रमुखता दी गयी है। उन्होंने प्रकाश डालते हुए कहा उपकार का प्रबल भाव रखने वाले एक विशेष व्यक्तित्व का आज जन्म हुआ था। न्याय का पक्ष लेने वाले वीर हनुमान श्री राम के परम भक्त थे। उन्होंने ध्यान आकृष्ठ करते हुए कहा हनुमान जयंती हकीकत मे सत्य से साक्षात्कार करने की जहां प्रेरणा देती है वही प्रभु भक्ति के प्रति समर्पण की ऐसी अलौकिक मिसाल मिलना मुश्किल है। जिनके घटा घट में श्री राम समा गये थे और जिनकी आत्मा का प्रभु से सीधा संबंध स्थापित हो गया था, ऐसे श्री राम भक्त श्री हनुमानजी का जीवन भक्ति की अनूठी मिसाल है।
   संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमण्डी

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