निज मे नियंत्रण ही व्यवस्था का मूल मंत्र है आचार्य श्री



जबलपुर-विश्व वंदनीय आचार्य श्री विधा सागर जी महाराज ने कहा नियंत्रण के लिये दुसरे की व्यवस्था की अपेक्षा स्वयम नियंत्रित हो यह सबसे अच्छा माना जाता है हजारो व्यक्ति होते है उनके नियंत्रण के लिये सेकड़ों व्यक्ति की आवश्यकता होती है अब यदि सेकड़ों भी अनियंत्रित हो तो औरों को भी और बुलाना पड़ेगा ऐसा करना सबसे अधिक महंगा होगा जबकि सस्ता यह होगा हम स्वयम नियंत्रित हो  इस तरह से साफ है की निज मे नियंत्रण सबसे आवश्यक है
    आचार्य श्री ने तिलवाराघाट दयोदय क्षेत्र मे मंगल उद्बोधन मे कहा अपने आप पर नियंत्रण होना ही मोक्ष है जब सामने अधिक लोग हो जाते  है तो वो सुनते कम सुनाते अधिक है  ऐसे मे कुछ उपयोगी सुनाना सार्थक नहीं रह जाता
        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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