योगेन्द्र जैन पोहरी। राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल की मंशा के अनुरूप शालाओं में भयमुक्त एवं आनंददायी वातावरण प्रदान करने के लिए विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी मोतीलाल खंगार एवं वीआरसीसी विनोद मुद्गल के निर्देशन में पोहरी एवं बैराड़ क्षेत्र के प्राथमिक एवं माध्यामिक विद्यालयों में नवीन शिक्षासत्र के साथ जॉयफुल लर्निंग गतिविधियाँ कराई जा रही हैं। शिक्षक-शिक्षकाएँ बच्चों के अलग-अलग समूह बनाकर उन्हें अंकज्ञान, वर्णज्ञान एवं शब्दज्ञान के साथ-साथ विभिन्न खेलों को खिलाते हुए अंग्रेजी, हिन्दी व गणितीय अवधारणाओं से अवगत करा रहे हैं।
शिक्षक श्याम बिहारी वर्मा 'सरल' द्वारा भी कई स्कूलों में कहानी व चित्रकथा को पद्यात्मक रूप देते हुए स-स्वर व हाव-भाव के साथ प्रस्तुत कर, संबंधित बहु विकल्पीय प्रश्नों को पूछते हुए गतिविधियों को रोचक बनाया जा रहा है। निर्धारित कलेण्डर की गतिविधियों के साथ-साथ परंपरागत कहानी "प्यासा कौआ" की थीम को आवश्यक सामग्री के साथ एक नए रूप में प्रस्तुत किया गया है। बच्चों के चहुमुखी विकास के लिए "सरल बाल पहेलियाँ" प्रमुख आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं। सरल बाल पहेलियों में कई पहेलियों का नया रूप देखने को मिला, देखिए कुछ इस तरह-
"काला-काला पक्षी देखो, कॉव-कॉव करता है।
पेड़ों पर वह बना घोंसला, अम्बर में उड़ता है।।
इसके अण्डे गोलमगोले, ये भेद आपणां खोले,
देखो, पंछी कौन बोले?"
"चींचीं करती फिरे फुदकती, घर-आँगन में रहती।
सुबह-सुबह जल्दी उठकर, ये राग प्रभाती गाती।।
इसके अण्डे गोलमगोले, ये भेद आपणां खोले,
देखो, पंछी कौन बोले?"
शिक्षक श्याम बिहारी वर्मा 'सरल' द्वारा भी कई स्कूलों में कहानी व चित्रकथा को पद्यात्मक रूप देते हुए स-स्वर व हाव-भाव के साथ प्रस्तुत कर, संबंधित बहु विकल्पीय प्रश्नों को पूछते हुए गतिविधियों को रोचक बनाया जा रहा है। निर्धारित कलेण्डर की गतिविधियों के साथ-साथ परंपरागत कहानी "प्यासा कौआ" की थीम को आवश्यक सामग्री के साथ एक नए रूप में प्रस्तुत किया गया है। बच्चों के चहुमुखी विकास के लिए "सरल बाल पहेलियाँ" प्रमुख आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं। सरल बाल पहेलियों में कई पहेलियों का नया रूप देखने को मिला, देखिए कुछ इस तरह-
"काला-काला पक्षी देखो, कॉव-कॉव करता है।
पेड़ों पर वह बना घोंसला, अम्बर में उड़ता है।।
इसके अण्डे गोलमगोले, ये भेद आपणां खोले,
देखो, पंछी कौन बोले?"
"चींचीं करती फिरे फुदकती, घर-आँगन में रहती।
सुबह-सुबह जल्दी उठकर, ये राग प्रभाती गाती।।
इसके अण्डे गोलमगोले, ये भेद आपणां खोले,
देखो, पंछी कौन बोले?"
इस प्रकार अनेक पक्षियों से संबंधित पहेलियों के उत्तर बच्चों द्वारा खेल-खेल में बड़े उत्साह के साथ ग्रुप में एक साथ जोर से बोलकर दिए जाते हैं।
वीआरसीसी मुद्रगल ने बताया मासिक कलेण्डर के मुताविक शैक्षिक गतिविधियाँ क्षेत्र में संचालित की जा रही हैं। तापमान अधिक होने के कारण भले ही बच्चों की संख्या शत-प्रतिशत नहीं है, किन्तु फिर भी शासन के इस कदम की सराहना की जा रही है।
मारोरा अहीर प्राथमिक-माध्यमिक विद्यालय पर सरल पोहरी द्वारा आज की दसवी गतिविधि "चित्र वर्णन" व "कार्ड उठाओ,अपनी जगह बनाओ" स्टाफ के शिक्षक- शिक्षकाओं के सहयोग से बच्चों को कराई गई। संस्था प्रधान दिनेश गुप्ता ने बताया कि विगत दिवसीय गतिविधियों में स्टॉफ एवं कविता शर्मा द्वारा कौन है लम्बा कौन है गोल, कंकड़-पत्थर, एक चिड़िया के बच्चे चार, पक्षियों की आवाज़, बैगन की वारात, वर्ण-अंक पहचान, सिंहासन पर लाल टमाटर, एवं सांप-सीढ़ी आदि के मनोरंजक व ज्ञानवर्धक खेल खिलाए गए।
एक शाला एक परिषर विद्यालय मारौरा अहीर पर प्रधानाध्यापक दिनेश गुप्ता, रामचरण शर्मा, महेन्द्र चतुर्वेदी, परसुराम, लक्ष्मण प्रसाद, रमेशचंद, अनिल कुमार शर्मा, एवं कविता शर्मा आदि शिक्षक-शिक्षकाओं द्वारा संपूर्ण खेल सामग्री का उपयोग करते हुए जॉयफुल लर्निंग गतिविधियों को गति दी जा रही है।

