राजनीतिक हलचल - मध्यप्रदेश की राजनीति ने सूबे का तापमान इतना गर्म कर दिया है कि रोज उथल - पुथल मच रही है । मिड नाइट पॉलिटिक्स ने प्रदेश भर में भाजपा और कांग्रेस की नींद हराम कर दी,निर्दलीय सहित सपा और बसपा ने कांग्रेस को भोपाल से लेकर दिल्ली और बैंगलोर तक की लंबी मैराथन करा दी । चारों तरफ भले ही होली का रंग खिल रहा हो लेकिन कांग्रेस के चेहरे से रंग उड़ गया है तो भाजपा का चेहरा खिलता दिखाई दे रहा है ।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक बार फिर कांग्रेस सरकार गिरने के आसार दिखाई दे रहे हैं,हमारे राजनीतिक संवाददाता के अनुसार खबर है कि सिंधिया समर्थक 17 विधायक और आधा दर्जन मंत्रियों के गायब होने की खबर है, अभी विधायक और मंत्री कहाँ है और किस मंसूबे से गायब है कोई पता नहीं लेकिन एक बात तो तय है कि कुछ भी उठापटक हो सकती है ।
इस समय जो सबसे बड़ी खबर मिल रही है वो है कि सिंधिया सरकार बन सकती है और इतना ही नहीं अपने वक्तव्य में अपने महाराज के प्रति अपनी निष्ठा ज़ाहिर करने वाले पोहरी विधायक सुरेश धाकड़ ( रांठखेड़ा ) भी अपने क्षेत्र से गायब है और यदि कयास सही निकले तो रांठखेड़ा अपनी सीट से स्तीफा देंगे और महाराज को पोहरी से आमंत्रित करेंगे,यदि ऐसा होता है तो सूबे में भाजपा के समर्थन से सिंधिया सरकार होगी ।
ज्ञात हो कि सिंधिया एक के बाद एक करके अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयान देते रहे हैं और अध्यक्ष,मुख्यमंत्री और राज्यसभा से वंचित रखा है । 2018 के विधानसभा चुनाव में "माफ करो महाराज" का नारा देने वाली भाजपा को सिंधिया कुछ समय से अत्यधिक प्यारे हो गये हैं,भाजपा में सिंधिया के धुर विरोधी नेता भी सिंधिया के खिलाफ बोलने से बचते रहे है । सब कुछ भविष्य के गर्भ हैं लेकिन फिलहाल तो समीकरण सिंधिया सरकार बनने के ही आसार दिखाई दे रहे हैं ।

