कोटा (राज) -परम् पूज्य सराकोद्धारक आचार्यश्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज मुनि 108 ज्ञेय सागर जी महाराज (ससंघ) का दिनांक 13 मार्च 2020,सुबह शुक्रवार, , श्री दिगम्बर जैन मन्दिर, विज्ञाननगर, कोटा से मंगलविहार हुआ पदविहार करते हुए आचार्यश्री ससंघ का श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, त्रिकाल चौबीसी, आर.के. पुरम भव्य मंगल प्रवेश हुआ। मंदिर पहुँचने 108 मंगल कलशों से श्रद्धालुओं ने पाद प्रक्षालन किया मंगल हुआ ।अरिहंत स्कूल के बच्चों ने भी भाव भीनी अगवानी की। जगह जगह पाद प्रक्षालन एवं मंगल आरती की ।श्रद्धालुओं ने खूब भक्ति भाव और श्रद्धा पूर्वक अगवानी की ।मंदिर समिति के अध्यक्ष जिनेंद्र जैन बरमुण्डा प्रचार प्रचारमंत्री पारस जैन पार्श्वमणि ने बताया कि धर्मसभा में जे. के.जैन इंजीनियर राजेश जैन खटोड़ चंद्रेश जैन पवन जैन पाटौदी ललित जैन मनोज जैन जयसवाल पारस जैन पत्रिका ने मंगल दीपप्रज्वलन एवम श्रीमती विमला जी जैन बबीता जी जैन सुलोचना जी जैन संगीता बाकलीवाल श्रद्धा जैन नीलम जैन ने शास्त्र भेंट किया ।चित्र अनावरण व पाद प्रक्षालन की क्रियाये भी की गई । धर्म सभा के प्रारंभ में मंगलाचरण पाठ श्रद्धालुओं को भावविभोर करते हुए पारस जैन पार्श्वमणि पत्रकार ने "गुरु आये नगरी हमारे पावन हो गई यह धरा रे "स्वरचित भजन सुनाकर किया। धर्म सभा का सफल संचालन पंडित अभिषेक जैन शास्त्री ने किया ।
पूज्य आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने कहा कि अभी सोलहकारण व्रत चल रहे है जिसमे दर्शनविशुद्धि आदि भावनाये समाहित है जिसमे दर्शन विशुद्धि को समझाया जिसमे कहा कि हमे अपने सम्यग्दर्शन को मजबूत बनाने के लिये मिथ्यात्व को छोड़ कर जीवन यापन करना चाहिये दूसरी विनय सम्पन्नता भावना को समझाया उसमे कहा कि मनुष्य को अपने जीवन मे नम्र परिणाम रखने चाहिए जितना हो सके उतना झुक कर अभिवादन करे और आचरण की शुद्धि बनाये रखे इतना ही नही उन्होंने कहा कि आज जो वर्तमान में कोरोना वायरस का प्रकोप है उसका कारण है कि आज वर्तमान में हम सभी भारतीय पद्धति को छोड़ कर पाश्चात्य की ओर बढ़ते जा रहे है इसलिये आज हमे अपने धर्म और समाज से जुड़ाव नही हो पा रहा है तो हम बाहर का भोजन ग्रहण करने लगे है जिससे हमें ओर बीमारी हो रही है। उन्होंने कहा कि अपने जीवन मे समर्पण भाव को अवश्य लाना चाहिए क्योकि आज का मानव तर्क में जीता है इसी लिए उसका जीवन नर्क बना हुआ है तर्क में नही समर्पण में जीये तो जीवन स्वर्ग बनेगा। जीवन मे बॉस नही घास बनकर रहे । हम अपने जीवन मे जितना समर्पण रखेगे जिसके प्रभाव से हमारे घरों में स्वर्ग का वातावरण रहेगा ओर अगर हमने दुसरो की बात को काटना चाहा तो उससे हमे भी उसके दुष्परिणाम का सामना करना पड़ेगा ।जो हमे ही कष्ट का कारण बनेगा अंत मे 24 घंटे के नियम में आज कोई भी 5 अनाज ग्रहण करने का नियम दिया।
ओर शास्त्र स्तुति के पश्चात दिगम्बर जैन समाज आर के पुरम कोटा में चातुर्मास हेतु एवम कुछ दिन ओर प्रवास हेतु श्रीफल चढ़ाया..।
धर्मसभा में श्री सकल दिगम्बर जैन समाज के पदाधिकारी सहित अमोलकचंद जी जैन सूरजमल सेठिया पंडित कोमल प्रसाद जैन लोकेश जैन बरमुंडा हरक चन्द जैन संजय जैन निर्माण संजीव जैन रितेश सेठी अनुज जैन दीपक जैन डीसीएम ज्ञानचंद जैन सोहन लाल जैन दिलीप बड़जात्या विमल चंद जैन अशोक जैन पी सी जैन सुनील जैन राजकुमार जैन टीकम जी जैन उपस्थित थे।
प्रस्तुति
पारस जैन पार्श्वमणी पत्रकार कोटा राजस्थान
