बांसवाड़ा-बाहुबली कॉलोनी जैन मंदिर में विराजित आर्यिका रत्न 105 अर्हम श्री माताजी ने अपने प्रात: काल प्रवचन में बताया प्रिय आत्मन दृष्टि बदलो सृष्टि बदलने की कोशिश मत करो, हमारी सोच बदलनी चाहिए। जितनी उत्कृष्ट हमारी सोच होती है उतने उत्कृष्ट हम होते हैं। इसलिए अच्छा सोचो सही सोचो तो हमारे जीवन में आई हुई समस्याएं समाधान के रूप में हर प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती है। क्योंकि चिंता और चिता में केवल एक बिंदु का अंतर है।लेकिन चिंता जीवित को जलाती है, वह चिता अजीवित को जलाती है। तो हम जीवित रहते हुए अपने आप को हम क्यों जलाएं। चिंता करने से आयु भी कम हो जाती है।जब हमें तनाव है तो ना तो भोजन अच्छा लगता है, नहीं घरवाले अच्छे लगते हैं। चिंता के कारण हम अपनों से दूर हो जाते हैं। आप सभी ने अभी देखा ही होगा की कोरोनावायरस में कितने अपनों ने अपना साथ तनाव और चिंता की वजह से छोड़ दिया। इसलिए बस यही सोचो, जहां समस्या है वहां समाधान भी है।यह जानकारी चातुर्मास कमेटी के प्रवक्ता महेंद्र कवालिया ने दी।
संकलंन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
