अनन्त चतुर्दशी पर्व के साथ दसलक्षण पर्व का समापन

 कोविड गाईडलाइन की पालना करते हुए प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकाली गई
रामगंजमडी-रविवार को अनन्त चतुर्दशी पर्व के साथ दसलक्षण पर्व का समापन हो गया प्रातः बेला में जिनालयों में अभिषेक किया गया। प्रातः बेला में महावीर जिनमंदिर में  श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः शांति धारा का पुण्य लाभ श्री विजय कुमार,
  अनीता,  गगन  अक्षय हरसोरा भानपुरा वाले एवं सोहन बाई राकेश  मुकेश जी दिनेश जी अतिशय जी तनय जी सबदरा ओसारा वाले एवं परिवार जन रामगंजमंडी को मिला।व दीप प्रज्वलन का सौभाग्य श्री पदमकुमार मधु सुरलाया को प्राप्त हुआ।
इसी कड़ी में मध्यान बेला में सरकार 
 के निर्देश व कोविड गाईडलाइन की पालना करते हुए समाजजन द्वारा प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकाली गई और दिव्य घोष के साथ शांतिनाथ मंदिर परिसर की परिक्रमा की गयी जब जिनालय की तीन फेरी लगाई एक अभूतपूर्व वातावरण प्रस्फुटित हो गया मंगल कलश का सौभाग्य श्रीमान दिलीप कुमार कमल कुमार अरुण कुमार संजय विनायका परिवार को मिला व श्रीमान प्रधुमन कुमार अमन कुमार सुरलाया परिवार को मिला वही अनन्त व्रत और दसलक्षण की माला का सौभाग्य श्रीमान विनोद कुमार मुकेश कुमार विनायका परिवार व श्रीमान सूरजमल राजेन्द्र कुमार बागडिया को मिला। वही  जिनालयों में पाण्डुक शिला में विराजमान कर विशेष पूजन अभिषेक किया गया। सभी ने इस पुनीत पर्व उपवास रखा व अपने प्रतिष्ठान को बंद रखा साथ ही पूरा दिन धर्म साधना व्यतीत किया वही शनिवार की रात्रिबेला में जिनालयों में  प्रतियोगिता आयोजित की गई शांतिनाथ दिगबर मंदिर में धार्मिक क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसका संचालन पंडित पीयूष शास्त्री व श्यामलता पल्लीवाल द्वारा किया इस प्रतियोगिता में  हुए रोमांचक मुकाबले को सिद्ध टीम ने अरिहन्त टीम से 14 रनों जीत लिया इस प्रतियोगिता के पारितोषिक पुण्यार्जक श्रीमान पदमकुमार सुलोचना अभिषेक लुहाडिया रहे। वही महावीर मंदिर में श्री वीर जैन सोशल ग्रुप की सांस्कृतिक प्रभारी श्वेता जैन, रीटा जैन व विनीशा जैन द्वारा धार्मिक प्रश्न व स्वास्तिक हाउजी प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया जिसका प्रथम पुरस्कार मधु डूंगरवाल
 द्वितीय पुरस्कार विशाला सुरलाया को मिला इस आयोजन के पारितोषिक पुण्यार्जक श्रीमती विनीशा सुरलाया के जन्मदिन के  अवसर पर श्रीमान पंकज  विनीशा सुरलाया रहे।वही पंडित श्री पीयूष शास्त्री द्वारा उत्तम आकिंचन धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा आज का धर्म खाली होने का धर्म है। रिक्त औऱ हलका होने का धर्म है। उन्होंने उदाहरण के माध्यम से कहा तराजू का पलड़ा जिधर ज्यादा वजन होता है उसकी अधोगति होती है। किंतु स्वभाव से कम वजनी पलड़ा ऊर्ध्वगति करता है। ऊँचाईयो को पाने के लिए हमें बाहर का भार तो कम करना ही पड़ेगा साथ ही भीतर का भार भी कम करना होगा। पण्डित श्री द्वारा अरिहन्त नाम सत्य है मार्मिक कविता को सुनाकर सभी को सच्चा दिग्दर्श कराया। एवम सभी को भाव विभोर कर दिया।
  अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी की रिपोर्ट

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