आगरा -अर्हम योग प्रणेता मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की निश्रा में मशहूर मोटिवशनल स्पीकर श्री उज्जवल पाटनी आए उन्होंने सभी को अपने उदबोधन से मोटीवेट किया। उन्होनें उदबोधन का शुभारभ करते हुए अर्हम योग की भरी भूरी प्रंशसा की उन्होनें कहा अर्हम योग ग्लोबल है। जिसे जैन समाज के अलावा अन्य लोग भी अनुकरण कर रहे है। उन्होंने कहा ज्ञान से कुछ नही होता उसे अमल में लाने से सब होता है। उन्होंने आगे कहा अगर सुखी रहना है तो अपनी राय जल्दी मत बनाए। आराम से बनाए। गुस्सा आने पर तत्काल गुस्सा मत करना, एक बड़ा सा व्हाट्सप मेसेज तैयार करना जो भी मन मे विचार हो। जो भी जिसके प्रति गुस्सा हो वह दो दिन तक मत भेजना। दो दिन बाद आप भेजना चाहोगे वह दो लाइन का रह जाएगा। क्योंकि आपका गुस्सा शान्त हो गया।
उन्होंने कहा लाइफ का कोई सीक्रेट नही होता आपकी एक आदत आपकी जिंदगी बदल देती है। अगर सफलता यदि पानी है तो एक आदर्श दोस्त या आदर्श व्यक्ति का चयन करो और तय करो मुझे इसके जैसा बनना है।अगर आपकी जिंदगी में यह आ गया कि iam a king तो आप खत्म हो जाओगे। जिसे आपने आदर्श माना यदि उसकी copy करना भी सीख लिया तो अपना जीवन उन्नत कर सकते है। ऐसे व्यक्ति को अपने जीवन का आदर्श बनाओ जो नेगेटिव बोलने से पहले बार बार सोचता हो। ऐसे लोग जो आपकी गलती निकाले उसको प्रणाम करें। उसकी सलाह ले।
मन के अंदर यह आना चाहिए मैं अहम हु, जब तक तुम खुद को इज्जत नही दोगे, तब तक सम्मान नही होगा। हम अपनी MRPस्वयं तय कर सकते है। यदि अहम माना तो समस्या होगी। यदि तुम्हे बड़ा बनना है तो विनम्र बनना होगा
एक कविता ने सभी का ध्यान अपनी और खींचा
श्री उज्जवल पाटनी की एक काव्य रचना ने सभी का ध्यान अपनी ओर कहा
है गुरु ज्ञानदायी न ज्ञान दो
जो ज्ञान दो ज्ञान है इतना भी मुझको ज्ञान दो
जो ज्ञान का ज्ञान दो न ज्ञान का अभिमान दो
जो ज्ञान का अभिमान दो औरों का गुणगान दो
जले भी दीपक सम प्रकाश फैलाए ऐसा हमे वरदान दो
उन्होंने कहा हमेशा जिंदा भाषा इस्तेमाल करो जिससे भी मिलो कहो गजब मजा आ रहा है। सब कुछ सुपर चल रहा है। यह भी स्वीकार करना सीखो जो कुछ भी हो रहा है उसका जिम्मेदार में स्वयं हु। किसी भी तरह का बहाना मत लो।
मैं एक महीने बाद आकर अर्हम योग का फीडबैक आपको दूँगा
श्री पाटनी ने अन्त में मुनि श्री के समक्ष्य कहा मैं अर्हम योग करूँगा औऱ उसका फीडबेक आपको एक महीने बाद आकर आपको दूँगा। उन्होंने में कहा जैनिज़्म ऐसा कही लॉजिकल है। जो अन्य धर्म मे नही। सन्तो की आहारचर्या अहिंसा अनेकान्त के आगे सब फैल है।उन्होंने मुनि संघ के चरणों मे नमन किया।औऱ अर्हम योग को शुभकामना प्रेषित की।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी की रिपॉर्ट
