भोपाल-उपचुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए जोबट से पूर्व विधायक सुलोचना रावत और उनके बेटे विशाल रावत ने भाजपा का दामन थाम लिया है। शनिवार देर रात इन्होंने मुख्यमंत्री आवास में सीएम शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली। इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था। कलावती भूरिया के निधन से यह सीट खाली हुआ है। अब बीजेपी सुलोचना या उनके बेटे विशाल में से किसी को इस सीट पर उम्मीदवार बना सकती है।
बीजेपी सूत्रों ने बताया कि पार्टी जोबट में कांग्रेस से मुकाबला करने के लिए एक दमदार उम्मीदवार की तलाश कर रही थी। सुलोचना और उनके बेटे विशाल को बीजेपी में लाने में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक एवं शिवराज सरकार में उद्योग मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव ने मध्यस्थता की है। वे ही दोनों नेताओं को अपने साथ शनिवार रात भोपाल लेकर पहुंचे थे। रविवार को सुबह 10:30 बजे सुलोचना रावत अपनी टीम के साथ बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचीं। यहां प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा उनके साथ जोबट सीट पर पार्टी की चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे।
कांग्रेस की बैठक के बाद ली सदस्यता
इधर, कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि शनिवार को ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के निवास पर बैठक हुई थी, जिसमें चुनाव प्रभारियों से चारों सीटों के लिए टिकट के दावेदारों के नाम लिए थे। बताया जाता है कि जोबट से जिला अध्यक्ष महेश पटेल का नाम सबसे ऊपर था। हालांकि कांग्रेस के सर्वे में महेश के अलावा सुलोचना रावत और दीपक पटेल का नाम भी आया था, लेकिन महेश पटेल का नाम लगभग फाइनल किया। कांग्रेस की यह बैठक रात 10:30 बजे खत्म हुई। इसके बाद रात करीब 12 बजे सुलेचना और विशाल ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।
चर्चा है कि सुलोचना रावत को बीजेपी जोबट से उम्मीदवार बना सकती हैं। यह आदिवासी बहुल इलाका है। सुलोचना वहां से कांग्रेस की विधायक रह चुकी हैं। बीजेपी में शामिल होने के बाद सुलोचना रावत ने कहा कि सीएम और पीएम के कामों से प्रभावित होकर बीजेपी की सदस्यता ले रहे हैं। सीएम ने अलीराजपुर के लिए काफी काम किया है।
बताया जा रहा है कि इस झटके को लेकर कांग्रेस को पहले से आभास जरूर था, मगर सभी लोग शांत रहे हैं। कांग्रेस ने पृथ्वीपुर सहित सभी सीट के लिए उम्मीदवार की घोषणा कर दी है।
मध्य प्रदेश में एक लोकसभा सीट और तीन विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। दो विधानसभा सीट पर पहले से कांग्रेस का कब्जा था। वहीं, एक लोकसभा और विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा था। सभी सीटों पर आठ अक्टूबर तक पर्चा दाखिल करने की अंतिम तिथि है। वहीं, 30 अक्टूबर को वोटिंग है। ऐसे में अब प्रदेश में जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है।
2013 में चुनाव हार गए थे विशाल रावत
सुलोचना रावत इसी सीट से 1998 और 2008 में विधायक रह चुकी हैं। विशाल को भी 2013 में कांग्रेस ने टिकट दिया था, लेकिन वे चुनाव हार गए थे। पिछला चुनाव वे निर्दलीय के रूप में लड़े थे। चुनाव हारने के बाद वे वापस कांग्रेस में आ चुके थे और टिकट की दावेदारी कर रहे थे। सुलोचना दिग्विजय सरकार में राज्यमंत्री रही हैं।
