पोहरी (शिवपुरी)। जिले के पोहरी ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पटपरी की 18 वर्षीय सुरजा आदिवासी के जीवन में सरकारी विभागों और नागरिक समाज के बेहतर समन्वय से सकारात्मक बदलाव आया है। विकास संवाद, स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग (ICDS) के संयुक्त प्रयासों से गंभीर रूप से एनीमिक रही सुरजा अब पूरी तरह स्वस्थ होने की ओर अग्रसर है।
सुरजा की जिंदगी अभावों के बीच गुजर रही थी। जब वह मात्र 8 वर्ष की थी, तब उसके पिता का निधन हो गया था। माँ नब्बों पर चार बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ गई। मजदूरी और आर्थिक तंगी के कारण सुरजा का स्वास्थ्य लगातार गिरता गया।
नवंबर माह में विकास संवाद द्वारा आयोजित किशोरी स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान एसएमसी काउंसलर रानी जाटव ने जांच में पाया कि सुरजा का हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 4.2 ग्राम रह गया था, जो अत्यंत गंभीर स्थिति थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपचार के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान की पहल की गई। सुरजा के घर पर 12 प्रकार की सब्जियों के बीज लगवाकर ‘पोषण वाटिका’ तैयार करवाई गई, जिससे उसे नियमित रूप से ताजी और हरी सब्जियां मिल सकें। काउंसलर रानी जाटव ने लगातार गृह भेंट कर परिवार को पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया।
जिला समन्वयक अजय यादव के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग और ICDS के साथ समन्वय स्थापित किया गया। बीएमओ के विशेष सहयोग से सुरजा के लिए अस्पताल में नि:शुल्क रक्त की व्यवस्था कराई गई और 20 नवंबर 2025 को उसे एक यूनिट ब्लड चढ़ाया गया।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सीएचओ राघवेंद्र सिंह गौतम द्वारा समय-समय पर निगरानी और परामर्श दिया गया। बेहतर खान-पान, पोषण वाटिका की हरी सब्जियों और उचित उपचार का सकारात्मक परिणाम 5 जनवरी 2026 को सामने आया, जब जांच में सुरजा का हीमोग्लोबिन बढ़कर 10.6 ग्राम हो गया।
आज सुरजा स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ रही है और यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि विभागों के बीच समन्वय और समुदाय की भागीदारी हो, तो गंभीर समस्याओं का भी स्थायी समाधान संभव है।