कोटा -क्षमावाणी कार्यक्रम मे मुनि श्री विनीत सागर जी महाराज एवम चंद्रप्रभ सागर जी महाराज ने अपने उदबोधन मे कहा क्षमा संसार का सर्वाधिक महान गुण है : विनीत सागर जी महाराज ने कहा कि अनतरंग कलुषिता को दूर करने से ही क्षमावाणी सफल हो सकती है। क्षमा को आत्मा से स्वीकार किया जाना चाहिए। क्षमा संसार का सर्वाधिक महान गुण है। इसको धारण करने वालों में महानता स्वतः ही आ जाती है। क्षमा धर्म को वर्ष भर धारण करने वाला व्यक्ति वैरागी होता है। क्षमा अन्तरंग तप है, शेष बाह्य कार्यक्रम केवल 'मैं' की तुष्टि के लिए ही किए जाते हैं।
मुनि श्री चंद्रप्रभ सागर जी महाराज ने कहा क्षमा मांगने से अधिक महत्वपूर्ण है क्षमा करना : उन्होने कहा कि यदि ऊपर मुस्कुराहट और अंदर कपट है तो 'उत्तम क्षमा' नहीं होती है। क्षमा मांगने से अधिक महत्वपूर्ण है, क्षमा करना। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गलती नहीं करता वह भगवान होता है, जो गलती को मान लेता है वह इंसान होता है, जो गलती को जात ही नहीं, वह नादान होता है, लेकिन जो बार बार गलती करके भी नहीं मानता, वह शैतान होता है
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

