आजकल लोग प्रमाद करते है इसलिए उपदेश उनके पल्ले नहीं पडता आचार्य श्री




जबलपुर-हम पहले सोचते है  उसके बाद वाक्य निर्माण होने पर बोलते है आजकल लोग प्रमाद बहुत करते है इसलिए उपदेश उनके पल्ले नहीं पडता यदि आप अभ्यस्त हो जाये तो तो बिना आंखो वही कार्य करते है उगलियों के माध्यम से आप बोल रहे है उसी के हिसाब से आप बोल रहे है व उसी के साथ उंगलिया भी चल रही होती है वहा जिसमे छेद होता है उसमे वादएन होता है जैसे हारमोनियम आदि उसे दबाते है तो छेद के कारण उसमे स्वर उभरता है हम अभ्यस्त नहीं होते तब तक संगीत मे पारंगत नहीं होते  धीरे धीरे स्वर निकालने की कला आती है अभ्यास और अनुभव का  महत्व होता है
   उक्त उद्गार बुधवार को नर्मदा तट तिलवाराघाट स्थित दयोंदय तीर्थ पर आचार्य श्री विधासागर जेआई महाराज ने व्यक्त किये उन्होने हजारो श्रद्धालुओ व श्रावकों पर ज्ञान वर्षा करते कहा योग और प्रयोग जीवन मे  अत्यंत महत्वपूर्ण है हमारा मन एकाग्र तब  होता है जब हम प्रयोग मे आ जाते है यदि हम सुनने लगते है तो बोलना भी आने लगता है किन्तु प्रमाद नहीं करना चाहिये अच्छा संगीतकर जानता है अच्छा सुन रहा होता है तभी वह अच्छा बजा रहा होता है इसलिये सोचना पहले बोलना बाद मे होता है
    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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