गुलगाव-गुलगांव गुणाेदय तीर्थक्षेत्र में गुरुवार काे जैन संत मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश हाेगा। तीर्थस्थल पर हाेने जा रहे महाअनुष्ठान में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज का सान्निध्य होगा। गुरुवार सुबह 8 बजे महाराज श्री का मंगल प्रवेश होगा। आदिनाथ भगवान के जन्म जयंती महोत्सव पर गुणोदय तीर्थ क्षेत्र गुलगांव में अनुष्ठान का आयोजन होगा।
एक रिपोर्ट क्षेत्र की
प्रवक्ता धनेश जैन ने बताया कि गुणोदय तीर्थ क्षेत्र में भूगर्भ से स्वत: ही प्रकट भारत वर्ष में एक मात्र प्रतिमा जो वर्षों तक जमीन में दबी रही, उनका पहली बार रिद्धि मंत्रों से आराधना हाेगी। 29 मार्च की सुबह 9 बजे 108 कलश से अभिषेक एवं शांति धारा की जाएगी। गुलगांव में करीब चार साल पहले मिली जिन प्रतिमाओं के साथ ही जिस तीर्थस्थल की रूपरेखा बनी थी, वह अब विधिवत रूप से आरंभ हाेकर आगे बढ़ रही है। यहां भगवान श्री आदिनाथ की पूजा अर्चना और महाअभिषेक किए जा रहे हैं। गुणोदय तीर्थ के नाम से विख्यात होने वाले इस तीर्थ को स्थापित करने की प्रेरणा सुधासागर जी महाराज के माध्यम से मिली जो अब मूर्त होने जा रही है। नारेली के बाद राजस्थान में यह दूसरा प्रमुख जैन तीर्थ होगा जो इस तरह से भव्य रूप लेगा। यहां आदिनाथ भगवान के साथ 24 तीर्थंकरों के भव्य मंदिर बनाए जाएंगे। इसे त्रिकाल चौबीसी नाम दिया गया है।
108 फीट ऊंचे कीर्तिस्तंभ में स्थापित होगी
1008 प्रतिमाएं : इस गुणोदय तीर्थ में चित्तौड़गढ़ के जैसा ही कीर्ति स्तंभ भी बनवाया जा रहा है जो 108 फीट ऊंचा होगा। इस विशाल और भव्य स्तंभ में 1008 जैन प्रतिमाएं स्थापित होगी। महान स्तंभ भी स्थापित की जा रहा है। धर्मशालाओं और संत शाला का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
एक रिपोर्ट क्षेत्र की
प्रवक्ता धनेश जैन ने बताया कि गुणोदय तीर्थ क्षेत्र में भूगर्भ से स्वत: ही प्रकट भारत वर्ष में एक मात्र प्रतिमा जो वर्षों तक जमीन में दबी रही, उनका पहली बार रिद्धि मंत्रों से आराधना हाेगी। 29 मार्च की सुबह 9 बजे 108 कलश से अभिषेक एवं शांति धारा की जाएगी। गुलगांव में करीब चार साल पहले मिली जिन प्रतिमाओं के साथ ही जिस तीर्थस्थल की रूपरेखा बनी थी, वह अब विधिवत रूप से आरंभ हाेकर आगे बढ़ रही है। यहां भगवान श्री आदिनाथ की पूजा अर्चना और महाअभिषेक किए जा रहे हैं। गुणोदय तीर्थ के नाम से विख्यात होने वाले इस तीर्थ को स्थापित करने की प्रेरणा सुधासागर जी महाराज के माध्यम से मिली जो अब मूर्त होने जा रही है। नारेली के बाद राजस्थान में यह दूसरा प्रमुख जैन तीर्थ होगा जो इस तरह से भव्य रूप लेगा। यहां आदिनाथ भगवान के साथ 24 तीर्थंकरों के भव्य मंदिर बनाए जाएंगे। इसे त्रिकाल चौबीसी नाम दिया गया है।
108 फीट ऊंचे कीर्तिस्तंभ में स्थापित होगी
1008 प्रतिमाएं : इस गुणोदय तीर्थ में चित्तौड़गढ़ के जैसा ही कीर्ति स्तंभ भी बनवाया जा रहा है जो 108 फीट ऊंचा होगा। इस विशाल और भव्य स्तंभ में 1008 जैन प्रतिमाएं स्थापित होगी। महान स्तंभ भी स्थापित की जा रहा है। धर्मशालाओं और संत शाला का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
