सावर-मुनि पुंगव सुधासागरजी महाराज ने कहा कि कोई भी मंदिर, गुरुद्वारा या मस्जिद किसी की मलकियत नहीं होती है। मंदिर सर्वसमाज के दर्शन के लिए होता है अगर किसी मंदिर पर कतिपय ट्रस्टी या चंद लोगों का कब्जा हो तो उस मंदिर का कभी विकास नहीं होता है। उन्होंने कहा कि जिस मंदिर के साथ हजारों लोगों की आस्था जुड़ी हो और उस मंदिर के विकास में हजारों हाथ एक साथ लगे तब वह मंदिर नहीं अतिशय कहलाता है। वे बुधवार को अपने सावर प्रवास के दौरान आयोजित मंगल प्रवचन कर रहे थे। मुनि श्री ने प्रवचन में गुलगांव स्थित राष्ट्रीय गुणोदय अतिशय की तुलना करते हुए कहा कि गुलगांव के इस अतिशय में अगर हजारों हाथों से विकास का संकल्प के भाव नहीं होते तो आज इसकी महिमा नहीं होती। गांव के मंदिर और जैन अतिशय में यही फर्क होता है। शाम को महाराज के सम्मुख ज्ञान प्रश्नोतरी कार्यक्रम हुआ। इससे पूर्व महाराज का जगह जगह पद पक्षालन हुआ। गुरुवार सुबह मुनि संघ का सावर से गुलगांव के गुणोदय अतिशय के लिए मंगल विहार होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
