व्यक्ति अपने विवेक से स्वयं रास्ता बनाएं: सुधासागरधर्मसभा : सिलोर कस्बे के शीलोदय तीर्थक्षेत्र में प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु




सिलोर-कस्बे के शीलोदय तीर्थक्षेत्र में शुक्रवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव सुधासागर जी  महाराज ने कहा कि भगवान यही चाहता है कि भक्त हमेशा परेशानी से जिए, ताकि वह अपने सुखद भविष्य के लिए अपने विवेक और मेहनत से स्वयं अपना रास्ता बना सकें।
मुनिश्री ने कहा कि मनुष्यों को इतनी इच्छाएं रखनी चाहिए, जो बिस्तर में जाने से पहले समाप्त हो जाए। मनुष्य की इच्छाओं का कभी अंत नहीं होता। उन्होंने मजदूर का उदाहरण देते हुए बताया कि एक मजदूर प्रारंभ में अशक्त मजदूर को सशक्त बनाया, ताकि वह मजदूरी कर सकें। वह मजदूरी के लिए दूर पैदल जाया करता था। उसके बाद उसने भगवान से साइकिल की मांग की कि मैं कम समय में मजदूरी के लिए पहुंच जाऊं। इसके बाद उसकी लालसा से बाइक आ गई। इसके बाद चार पहिया का वाहन मांगने लगा। आखिर इंसान की ओर अधिक पाने की लालसा कभी कम नहीं होती और वही उसके विनाश का कारण होता है। सबसे ज्यादा जो ईश्वर ने दिया, उसी पर संतोष करके जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सदा जीवन में अपनी योग्यता, विवेक और बुद्धि से आगे बढ़ाना चाहिए। मुनिश्री ने धर्मसभा में रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण की भक्ति से प्रसन्न होकर सभी देवताओं ने इच्छापूर्ति करते हुए आशीर्वाद दिया। रावण को मायावी शक्तियां भी उपलब्ध थी, जिससे वह किसी भी प्रकार का रूप धारण कर सकता था। अंत में यही मायावी शक्तियां उसकी मृत्यु का कारण बना।
भगवान भक्तों की लेते हैं कठोर परीक्षा
मुनि श्री ने कहा कि भगवान भक्तों की सहायता करने के लिए बहुत कठोर परीक्षा लेते हैं।
जैसे द्रोपदी के चीर हरण के समय अंत में उसकी लज्जा बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उसकी सहायता की।
      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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