दूसरों के लिए अच्छा सोचने पर हमारा अच्छा ही होगा : मुनि श्री


अरथूना-श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर की दिव्य और भव्य चित्ताकर्षक वेदी पर विराजमान भगवान चंद्रप्रभ के पावन दरबार में अष्टाह्निका पर्व के तहत शांतिधारा की गई।
आचार्य श्री  विद्यासागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री  समता सागरजी महाराज  ने संत शिरोमणी प्रवचन माला के स्वाध्याय में कहा कि आज इंसान ही इंसान का दुश्मन बन गया है। हर कोई एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगा रहता है। आज इंसान दूसरों के बारे में अच्छा सोचने और अच्छा करने लग जाए तो ही इंसान में इंसानियत की प्रतिष्ठा हो सकती है। जीवन में मावन मात्र के कल्याण की भावना होनी चाहिए। यदि हम किसी का भला नहीं कर सकते तो उसके लिए कम से कम बुरा भी नहीं करना चाहिए। जितना संभव हो उतनी असहायों की मदद करते हुए सामाजिक और धार्मिक कार्यों के लिए भी समय निकालना चाहिए। वर्तमान में जीवन मूल्यों की अत्यंत आवश्यकता भी है। इस अवसर पर  कई श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।
     संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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