अलोद-कस्बे के श्रीपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में रविवार को मुनि पुंगव सुधासागरजी महाराज ने तीन दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ कार्यक्रम में प्रवचन देते हुए कहा कि विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान शेर की तरह पाकिस्तान में घुसा और पाक धरती पर भारतमाता का जयघोष लगाया और सकुशल लौट आया। यह उसके पुण्य का ही प्रभाव था।
उसे अपनी नहीं अपने देश की ज्यादा चिंता थी। स्वयं मिट जाऊंगा, लेकिन देश पर आंच नहीं आने दूंगा। वह हिंदुस्तान का सैनिक नहीं भारत माता का सपूत बेटा था। धर्म जब साथ देता है तो पता ही नहीं चलता है, किस मोड़ पर आकर हमारी सहायता करता है। भगवान कोई साधारण शक्ति नहीं है। भगवान के पास जाए तो अर्जुन बनकर जाए। कभी दुर्योधन बनकर मत जाना। मुझे भगवान से कुछ नहीं चाहिए। मुझे तो भगवान स्वयं चाहिए। उन्होंने कहा कि जब गुरु के पास जाए तो आशीर्वाद मत मांगना, स्वयं गुरु को ही मांग लेना, जो संकट में काम आए।
उसे अपनी नहीं अपने देश की ज्यादा चिंता थी। स्वयं मिट जाऊंगा, लेकिन देश पर आंच नहीं आने दूंगा। वह हिंदुस्तान का सैनिक नहीं भारत माता का सपूत बेटा था। धर्म जब साथ देता है तो पता ही नहीं चलता है, किस मोड़ पर आकर हमारी सहायता करता है। भगवान कोई साधारण शक्ति नहीं है। भगवान के पास जाए तो अर्जुन बनकर जाए। कभी दुर्योधन बनकर मत जाना। मुझे भगवान से कुछ नहीं चाहिए। मुझे तो भगवान स्वयं चाहिए। उन्होंने कहा कि जब गुरु के पास जाए तो आशीर्वाद मत मांगना, स्वयं गुरु को ही मांग लेना, जो संकट में काम आए।
दुख में साथ ना छोड़े वही सच्चा मित्र
विपरीत परिस्थितियों में भी साथ ना छोड़े उसे सच्चा मित्र कहते हैं। परिणाम की चिंता किए बिना अच्छे कार्यों की शुरुआत करनी चाहिए। सकारात्मक सोच से ही गरीबी और अभाव में भी आनंद के झरने फूट पड़ेंगे। तीन दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में विधिविधान के साथ वेदी की प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया की ओर से मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के संघ सानिध्य मे कराई गई। सुबह 7 बजे भगवान के नित्याभिषेक, शांतिधारा, आहारचर्या, मंगलप्रवचन हुए।
श्रीजी की शोभायात्रा का स्वागत
कार्यक्रम से पहले कस्बे में श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गई, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए दो किमी दूर कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। ग्रामीणों ने शोभायात्रा का स्वागत किया और जगह-जगह रंगोली सजाई गई। मुनियों के पाद-प्रक्षालन और आरती उतारने की होड़ लगी रही। शोभायात्रा में सबसे आगे घुड़सवार धर्म ध्वजा लेकर चल रहे थे। उनके पीछे बैंडबाजे और विजय घोष भक्ति गीतों की स्वर लहरियां बिखेरते चल रहे थे। इंद्राणियों ने सिर पर मंगल कलश धारण कर रखे थे। युवतियां भक्ति नृत्य करते चल रही थी। युवा भगवान के जयकारे लगा रहे थे। शोभायात्रा में श्रीजी रथ पर विराजित थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
विपरीत परिस्थितियों में भी साथ ना छोड़े उसे सच्चा मित्र कहते हैं। परिणाम की चिंता किए बिना अच्छे कार्यों की शुरुआत करनी चाहिए। सकारात्मक सोच से ही गरीबी और अभाव में भी आनंद के झरने फूट पड़ेंगे। तीन दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में विधिविधान के साथ वेदी की प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया की ओर से मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के संघ सानिध्य मे कराई गई। सुबह 7 बजे भगवान के नित्याभिषेक, शांतिधारा, आहारचर्या, मंगलप्रवचन हुए।
श्रीजी की शोभायात्रा का स्वागत
कार्यक्रम से पहले कस्बे में श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गई, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए दो किमी दूर कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। ग्रामीणों ने शोभायात्रा का स्वागत किया और जगह-जगह रंगोली सजाई गई। मुनियों के पाद-प्रक्षालन और आरती उतारने की होड़ लगी रही। शोभायात्रा में सबसे आगे घुड़सवार धर्म ध्वजा लेकर चल रहे थे। उनके पीछे बैंडबाजे और विजय घोष भक्ति गीतों की स्वर लहरियां बिखेरते चल रहे थे। इंद्राणियों ने सिर पर मंगल कलश धारण कर रखे थे। युवतियां भक्ति नृत्य करते चल रही थी। युवा भगवान के जयकारे लगा रहे थे। शोभायात्रा में श्रीजी रथ पर विराजित थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
