बांसवाड़ा-रविवार को सुभूषणमती माताजी के सानिध्य में दीक्षार्थी बाल ब्रह्मचारी शिवानी दीदी को आर्यिका दीक्षा और ब्रह्मचारी हीरा दीदी को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की गई। सुबह में दोनो दीदीयों का मंगल स्नान करवाकर गाजे-बाजे के साथ पांडाल में लाया गया, जहां पर दोनो दीक्षार्थियों ने गुरु मां के आदेश के बाद शिवानी दीदी के केशलोचन के साथ दीक्षा विधि विधान के साथ संपन्न की। दीक्षा के बाद शिवानी दीदी का नामकरण आर्यिका अंश भारती माता और हीरा दीदी का नामकरण क्षुल्लिका दक्ष भारती माता रखा गया। धर्म सभा को संबोधित करते हुए सुभषण मति माताजी ने कहा कि जब भारत में एक जैन साधु बनता है, तो पूरी जैन समाज चिंता करती है। सच्चे अर्थों में अनुमोदना यही हैं कि जैन साधु को ग्रंथ न दे सको तो कोई बात नहीं परंतु अपने नगर में आने पर पाणी पात्र में आहार जरूर देना। शास्त्र, वस्त्र देने वाले बहुत मिल जाएंगे, लेकिन जो साधु की चर्या से जुड़ता है वह ही सच्चा श्रावक है।
चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी मुनिराज, आचार्य अभिनंदन सागर जी मुनिराज, व दयासागर जी मुनिराज की तस्वीर का अनावरण किया गया। इसके बाद आचार्य अभिनंदन सागरजी मुनिराज की दीक्षा अर्द्ध शताब्दी महोत्सव पर जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फलों की 50 -50 थालियों को सजाकर अष्ट दर्यों से पूजा की। समारोह में 50 श्रावक गुरु महाराज अभिनंदन सागर जी के जीवन में समर्पित थे, उनका सम्मान किया गया। दीक्षा समारोह में मंदसौर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात से भक्तों ने भाग लिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी मुनिराज, आचार्य अभिनंदन सागर जी मुनिराज, व दयासागर जी मुनिराज की तस्वीर का अनावरण किया गया। इसके बाद आचार्य अभिनंदन सागरजी मुनिराज की दीक्षा अर्द्ध शताब्दी महोत्सव पर जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फलों की 50 -50 थालियों को सजाकर अष्ट दर्यों से पूजा की। समारोह में 50 श्रावक गुरु महाराज अभिनंदन सागर जी के जीवन में समर्पित थे, उनका सम्मान किया गया। दीक्षा समारोह में मंदसौर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात से भक्तों ने भाग लिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
