कोटा-आर्यिका विभाश्री माताजी ने गुरुवार को रिद्धि सिद्धि नगर जैन मंदिर में धर्मसभा में कहा कि वस्तु के स्वरूप के निश्चय को निर्देश कहते हैं। सम्यक ज्ञान के मतिज्ञान, श्र्रुतज्ञान, अवधि ज्ञान, मनः पर्याय ज्ञान, केवल ज्ञान होते हैं। माता ने कहा कि अष्ट द्रव्यों से भगवान की आराधना करें। जिनवाणी पढ़ने से सम्यक्त्व उत्पन्न होता है। स्पर्शन, रसना, घ्राण,चक्षु, कर्ण ये पांच इन्द्रियों से हम जो भी जानते हैं, वह सब मतिज्ञान है। सब द्रव्यों और उनकी सब पर्यायों को एक साथ स्पष्ट जानने वाले ज्ञान को केवल ज्ञान कहते हैं। सम्यज्ञान को प्रमाण कहते हैं। कार्यक्रम की पत्रिका का विमोचन माता के समक्ष समाज के गणमान्य लोगों ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
