योगेन्द्र जैन(पोहरी) शिवपुरी- लोकसभा चुनाव का बिगुल बजते ही सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है ,प्रत्येक सीट पर दावेदारों की एक लंबी फेरिहस्त है इसलिए निर्णय लेने में सबका पसीना छूट रहा है, कोई भी दल अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को वॉक ओवर नहीं देना चाहता है । मध्यप्रदेश की सबसे हाई प्रोफाइल सीट गुना - शिवपुरी संसदीय क्षेत्र को माना जाता है क्योंकि यहाँ से 1957 से लेकर अब सिंधिया रियासत के मुखियाओं ने ही प्रतिनिधित्व किया है फिर चाहे भाजपा,जनसंघ या कांग्रेस हो । वर्तमान में कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता और भाजपा के निशाने पर रहने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया यहाँ से सांसद हैं और भाजपा उन्हें किसी भी तरह उनके ही किले में कैद रखना चाहती है ।
इस बार होगा त्रिकोणीय मुकाबला-यहाँ कोई दल चुनाव नहीं जीतता है बल्कि महल चुनाव जीतता आ रहा है फिर चाहे प्रत्याशी सिंधिया परिवार से हो या फिर महल समर्थक ,भाजपा ने हर बार ही प्रत्याशी बदलकर देख लिया लेकिन हर बार ही वो सिंधिया के अभेद किले को जीतने में नाकाम ही रही है लेकिन इस बार बसपा ने सिंधिया के खिलाफ एक ऐसा कार्ड चला है जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही अपनी नई रणनीति सोचने पर मजबूर कर दिया है । इस बार बसपा और सपा गठबंधन ने धाकड़ लोकेंद्र सिंह राजपूत को प्रत्याशी बनाया है, लोकेंद्र सिंह लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं और सत्ता परिवर्तन यात्रा कर जनता के बीच पहुंच कर सामन्तवाद को खत्म करने का आव्हान कर रहे हैं ।
सोशल इंजीनियरिंग की राजनीति करने वाली बसपा ने न केवल बसपा के वोट बैंक को साधा है बल्कि भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है क्योंकि गुना संसदीय क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग खासकर धाकड़ और यादव जाति की बहुलता है, ऐसे में पिछड़े वर्ग के साथ साथ लोकेन्द्र सिंह धाकड़ समाज के बीच एक अलग ही पहचान रखते ऐसे में जो वोट धाकड़ समाज का शिवराज सिंह के पक्ष में पड़ता था वो लोकेंद्र सिंह को मिल सकता है ऐसे में मुकाबला रोचक होने के साथ ही त्रिकोणीय होता दिखाई दे रहा है ।
सोशल इंजीनियरिंग की राजनीति करने वाली बसपा ने न केवल बसपा के वोट बैंक को साधा है बल्कि भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है क्योंकि गुना संसदीय क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग खासकर धाकड़ और यादव जाति की बहुलता है, ऐसे में पिछड़े वर्ग के साथ साथ लोकेन्द्र सिंह धाकड़ समाज के बीच एक अलग ही पहचान रखते ऐसे में जो वोट धाकड़ समाज का शिवराज सिंह के पक्ष में पड़ता था वो लोकेंद्र सिंह को मिल सकता है ऐसे में मुकाबला रोचक होने के साथ ही त्रिकोणीय होता दिखाई दे रहा है ।
