सागर -पाश्चात्य संस्कृति और को-एजुकेशन के साथ टीवी चैनलों और एंड्राइड मोबाइल के दुष्प्रभाव के चलते किशोरवय बच्चों का नैतिक पतन हो रहा है। जिससे समाज परिवार और धर्म संस्कृति दूषित हो रही है। यह बात वर्णी भवन मोराजी में विराजमान वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भय सागर जी महाराज ने प्रवचनों में कही। उन्होंने कहा कि पहले मंदिर जाकर विवाह संपन्न कराते थे। परंतु आज कोर्ट जाकर विवाह संपन्न कराए जा रहे हैं। माता पिता परिवार जीते जी मरण को प्राप्त हो जाते हैं। सोचो मात्र अपनी इच्छा पूर्ति के लिए कॅरियर व कैरेक्टर को बर्बाद करना कहां की बुद्धिमानी है। आज का युवा पढ़ लिखकर मूर्खता के काम कर रहे हैं। आचार्यश्री ने कहा कि बेटे का ऋण तब चुकता है जब वह पिता की अर्थी को कंधा लगाकर अग्नि संस्कार करता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
