सागर - प्रवचन आगामी सूचना तक स्थगित रहेंगे। शंका समाधान कार्यक्रम होगा लेकिन उसमें प्रवेश सीमित रहेगा। आप अपने सवाल दोपहर 12 बजे तक भेज सकते हैं। जो भी प्रश्न चुने जाएंगे। उन्हें 3 बजे तक सूचना दे दी जाएगी। कोरोना वायरस के चलते ऐसा किया जा रहा है।यह बात मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज ने गुरुवार काे धर्म सभा में कही।
उन्होंने कहा कि जन्म से न कोई महात्मा होता है और न ही दुरात्मा। लाेग संत भी होते हैं और दुर्जन भी। यह उसकी जीवन शैली पर निर्भर करता है। सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए आपको पॉजीटिव, पोलाइट, कोऑपरेटिव और कंस्ट्रक्टिव बनना होगा यदि यह चारों बातें आपने अपने अंदर पूरी कर ली तो आप से श्रेष्ठ कोई नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एक आदमी सपने में मर गया और मंगल ग्रह की अजायबघर में पहुंच गया। वहां पर दुनिया भर की कृतियों को देखा ताे पाया कि दुनिया में श्रेष्ठ कृति भी आदमी था और निकृष्ट कृति भी आदमी ही था। रचनात्मक दिशा में जो बढ़ता है वह सर्वश्रेष्ठ बन जाता है। जब वह विध्वंसात्मक गतिविधियों में जुड़ जाता है तो वह निकृष्ट बन जाता है। हमें यह खुद ही आंकलन करना है और शुरुआत भी स्वयं से करना चाहिए। स्वयं के प्रति पॉजिटिव होने का मतलब है स्वयं जागरूक सावधान सतर्क और सजग रहना है स्वयं के प्रति पॉजिटिव का मतलब सेल्फ कॉन्फिडेंस होना चाहिए। मनुष्य अपने प्रति ही सबसे ज्यादा नकारात्मक है। यह अपने ऊपर निर्भर है। हमें अपनी अवधारणा बदलना होगी। परिभाषाएं बदलना होंगी। जीवन में ऐसा कोई काम न करें जिससे तुम्हारी आत्मा दुखी हो। स्वजनों के प्रति हम कितने पॉजिटिव हैं। हमें उनकी भावनाओं का सम्मान करना सीखना होगा। संबंधों पर प्रगाढ़ता जब आती है तो एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है। हमेशा अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहें। भावनाओं को सम्मान दें किसी के सहारे की आवश्यकता न पड़े। मनुष्य के अंदर का ईगो उसे ऐसे बना देता है जहां अपने हित की बात ही आती है वही नकारात्मकता है। जहां दोनों के हित की बात आती है वही सकारात्मकता है। ऐसा कोई कृत्य नहीं करना चाहिए जिससे समाज का अहित हो। समाज के कल्याण के लिए कार्य करते रहें। समाज से फायदा तो सब लोग उठाना चाहते हैं लेकिन समाज के हित में काम करना कम लोग जानते हैं। एक दूसरे के प्रति विनम्र होना सीखिए। विनम्रता से लोग न केवल करीबी बढ़ाएंगे, बल्कि जिस तरह आप उनका सहारा बनेंगे। उसी तरह वह भी आपके लिए हर समय सहयोग करने तत्पर रहेंगे।
जब बड़े बाेल रहे हाें ताे बच में नहीं बाेलना चाहिए
विश्वनाथ आनंद का एक उदाहरण देते हुए मुनिश्री ने कहा कि ट्रेन में यात्रा करते समय एक वृद्ध ने विश्वनाथ से पूछा क्या करते हो तो उसने उन्होंने कहा में शतरंज खेलता हूं। फिर क्या था उन वृद्ध ने उनसे कहा इतने बड़े हो गए हो अभी भी शतरंज खेलते हो कोई काम करो यह करो वह करो और 50 प्रकार की बातें उनको सुना दीं। उनका स्टेशन आया तो विश्वनाथ ने उनका बैग उठाया और उनको नीचे छोड़ने चले गए तो विश्वनाथ का जो दोस्त साथ में था उसने कहा एक तो तुमने इतनी बातें सुन ली और ऊपर तुम उनकी सेवा करने चले गए। तो विश्वनाथ ने कहा जब बड़े बोल रहे हों तो बीच में नहीं बोलना चाहिए। यह मेरे संस्कार के विरुद्ध है। काेराेना वायरस के चलते लाेगाें के स्वास्थ्य काे देखते हुए मुनिश्री ने शंका समाधान कार्यक्रम 25 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया है। गुरुवार काे भी यह कार्यक्रम नहीं हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
