बावनगजा-सिद्ध क्षेत्र बावनगजा एक बार फिर संतों के सानिध्य में कार्यक्रम होंगे। गुरुवार की शाम मुनिश्री विनम्र सागर जी महाराज ने ससंघ मंगल प्रवेश किया। इनकी आगवानी के लिए समाज के लोगों ने रंगोली सजाई, पाद प्रक्षालन किया, मंगल आरती के साथ गीत गाए। मंगल प्रवेश के बाद मुनिश्री ने ससंघ गुरुभक्ति की।
बावनगजा ट्रस्टियों ने बताया मुनिश्री का ससंघ मंगल प्रवेश होने के बाद सभी संतों ने पहाड़ी पर विराजमान आदिनाथ भगवान के दर्शन किए। स्तुति-आराधना की और सभी श्रावकों ने गुरुवर का आशीर्वाद लिया। गुरुवर ने बावनगजा की महिमा बताई। दक्षिण भारत से आए श्रावकों ने गुरुवर के श्रीचरणों में श्रीफल भेंट करते हुए जीवन उन्नत बनाने का आशीर्वाद लिया। नेमावर में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरणों में व्रत ग्रहण करके बावनगजा में गुरुवर के दर्शनों का लाभ लिया। इस दौरान गुरुवर ने कहा इतनी बड़ी संख्या में एक साथ बहुतम के साथ संयम व्रतों को जो स्वीकार किया इस बात को इतिहास के पन्नों पर लिखा जाएगा।
प्रवचनों में ये बोले मुनिश्री
गुरुवार की शाम मुनिश्री का मंगल प्रवेश हुआ था। शुक्रवार को प्रवचन दिए। इस दौरान बताया संसार में हमें जो वस्तु दुख देती है या जिनसे हमें दुख मिलता है। उन्हें छोड़ देने का नाम ही व्रत है। व्रत देकर के इतने बड़े आचार्य परमेष्ठी ने कायोत्सर्ग किया। हम सभी को जीवन का उपभोग नहीं, उपयोग करना चाहिए। तप साधना ही जीवन का श्रेष्ठतम उपयोग है। जीवन का उपयोग वहीं कर पाते हैं। जिनकी आत्मा जागृत होती है। जो अपनी आत्म शक्ति को पहचानते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
