राजनीतिक : बीते दिनों सूबे की राजनीति में चर्चित चेहरा रहे और किंग मेकर की भूमिका अदा करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया की भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सरकार में कितनी तूती बोल रही है इस बात का अंदाज तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी हाल ही में सरकार के मंत्रिमंडल में छः सीट रिक्त होने के बाबजूद केवल दो सीटों पर सिंधियाई विधायक तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को मंत्रिमंडल में जगह देकर मंत्रिमंडल विस्तार से इतिश्री कर ली गई ।
अब सरकार के बाद प्रदेश भाजपा संगठन विस्तार यानी प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा टीम का गठन किया गया है जिसमे न केवल वीडी समर्थक नेताओं को भरपूर तवज्जों दी गई है बल्कि सिंधियाई नेताओं को जगह न देकर भाजपा ने सिंधिया को संकेत दे दिए हैं कि हम केवल सत्ता तक तुम्हारी शर्तों में बंधे थे, संगठन में जगह उनको मिलती है जो संघ की नर्सरी को पहचानते हैं । राजनीतिक जानकारों द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि सिंधिया समर्थक मदन कुशवाह ग्वालियर को संगठन में प्रदेश मंत्री बनाकर पार्टी ने सिंधिया को संतुष्ट करने की कोशिश की गई है लेकिन सच्चाई इसके इतर कुछ और ही है क्योंकि मदन कुशवाह के राजनीतिक सफर पर गौर किया जाए तो कुशवाह ग्वालियर में बसपा के नेता हुआ करते थे हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया था और दल बदल की बहती धार में बीते दिनों उन्होंने भी डुबकी लगाकर भाजपा को अपना लिया था इसका इनाम उन्होंने प्रदेश मंत्री बनाकर मदन कुशवाह को पुरस्कृत कर दिया । इससे पूर्व ज्योतिरादित्य सिंधिया को भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी, जानकारी के मुताबिक सिंधिया को भारतीय जनता पार्टी ग्वालियर के एक मंडल कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया था ।
