दिगंबराचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने जैन श्रद्धालुओं को दिया प्रवचन
गया-विपत्ति आए तो घबराएं नहीं, मुस्कुराएं। कष्ट क्षण मात्र में क्षय को प्राप्त होगा, फिर इससे निपटने के लिए नए रास्ते खुलेंगे। बुधवार को शहर के रमना रोड स्थित जैन भवन के धर्मसभा में प्रवचन के दौरान दिगंबराचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने उक्त बातें कहीं। उन्होने कहा कि विपत्ति-संपत्ति दोनों में समता रखो, तो उन्नति निश्चित है।
जगत् के लोग दूसरों को विपत्ति में डाल हर्षित होते है, पर यह हर्षित खुद के लिए दु:ख का गड्ढा खोदते है। मत करो किसी के अशुभ का विचार। किसी का उपकार न कर सको तो कम से कम किसी का अपकार भी मत करो। परस्पर सहयोग, प्रेम-वात्सल्य का व्यवहार करो। विश्व मैत्री, समाज की अखंडता पर विचार करो। अखंडता में जो आनंद है वह खंड-खंड में नहीं। एकता उन्नति का प्रतीक है। आचार्य श्री ने कहा कि सबके दिन एक से नहीं होते। सब दिन भी एक सा नहीं होता। व्यक्ति को अधिकार प्राप्त कर अहंकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक श्रेष्ठ मानव जहां निवास करता है वहां संस्कार-संस्कृति स्वयमेव ही जयवंत रहती है।
संकलंन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
