जिन विचारों से कर्म का लेख लिखा जाता है उन्हीं विचारों से लेख मिटाया जाता है: आचार्य

दमोह-वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज संघ सहित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर जबलपुर नाका दमोह में विराजमान हैं। आचार्य श्री ने समय का महत्व बताते हुए कहा समय का निरंतर प्रवाह महान है समय को कोई पकड़ नहीं सकता है समय को अपनी आत्मा में लीन योगी पकड़ सकता है। आत्मा में लीन योगी निरंतर सामयिक कर रहा है ऐसा जैन धर्म का कथन है। जिसके जीवन में सामयिक है उसका जीवन ही सामयिक है। जिसने इंद्रिय और कषायों को जीत लिया है उसके जीवन में ही सामयिक है। जिसके जीवन में सही पुरुषार्थ है, संयम है, विज्ञान है, परोपकार की भावना है उसका जीवन ही उपयोगी है। आचार्य श्री ने कहा ज्ञान एक प्रकाश है उससे दूसरे प्रकाश की जरूरत नहीं होती है। अमावस्या की रात में आंख पर पट्टी बांधकर और आंख बंद करके अंधेरे कमरे में बैठ जाने पर भी पूर्व में जाना हुआ पदार्थ ज्ञान में सब झलक जाता है, इस से ज्ञात होता है कि ज्ञान स्वयं प्रकाशमय होता है। जैसे टीवी और मोबाइल में बटन दबाते ही सब दिखाई देने लगता है वैसे ही केवल ज्ञान होने पर संसार के सभी पदार्थ दिखाई देने लगते हैं। ज्ञान स्व और पर दोनों का ज्ञाता होता है। आचार्यश्री ने कहा भगवान की शरण के बाद दांपत्य जीवन की शरण का महत्व है। जिन विचारों से कर्म का लेख लिखा जाता है उन्हीं विचारों से कर्म का लेख मिटाया जाता है। जिन विचारों से राह भटकते हैं उन्हीं विचारों से राह मिलती है। जिन विचारों से जिंदगी उलझती है उन्हें विचारों से जिंदगी की समस्या सुलझती है जिन विचारों से मुश्किलें बढ़ती हैं उन्हीं विचारों से मुश्किलें घटती हैं। इसलिए विचारों को महत्व देना चाहिए। अच्छे विचार करना चाहिए।
           संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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