दमोह-जबलपुर नाका स्थित जैन मंदिर में सोमवार को वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भय सागर जी महाराज ने कहा ज्ञान दर्पण का काम करता है। जैसे दर्पण में पदार्थ छलकते हैं वैसे ही ज्ञान में पदार्थ छलकते हैं। ज्ञान से ही आत्मा पदार्थों को जानती है। ज्ञान के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं है। ज्ञान के माध्यम से ही विज्ञान ने सुख सुविधाओं के साधन दिए हैं। साधनों के कारण आज का आदमी आलसी हो गया है। भौतिक साधनों के कारण आत्म साधना छूट गई है। आलस्य के कारण व्यक्ति बीमार पड़ रहा है। आलस्य के कारण ही तनाव, चिंता, दुविधा आदि अनेक समस्याएं पैदा हो रही है। इसी कारण आलस्य को शत्रु कहा है। आचार्यश्री ने कहा शरीर की ओर देखने से जीवन बाल, वृद्ध और जवान के रूप में दिखता है इसीलिए आत्मा की ओर देखो। आत्मा का कभी बुढ़ापा नहीं आता। आत्मा की ओर देखने वाला सदा जवान बना रहता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
