केदारेश्वर धाम में महाशिवरात्रि पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, प्रशासन ने लगाई कड़ी सुरक्षा

हितेश जैन, पोहरी। शिवपुरी जिला मुख्यालय से लगभग 35 किमी दूर और पोहरी में स्थित प्राकृतिक एवं धार्मिक आस्था का केंद्र केदारेश्वर धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हरे-भरे जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस धाम ने दर्शनार्थियों और प्रकृति प्रेमियों दोनों का ध्यान खींचा। पहाड़ियों के बीच स्थित इस प्राचीन मंदिर में एक प्राकृतिक गुफा में शिवलिंग स्थापित है। गुफा की ऊपरी हिस्से से निकलती शीतल जलधारा लगातार शिवलिंग पर गिरती रहती है, जिसे भक्तजन भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक मानते हैं।
इस वर्ष मेले में लगभग 100 से अधिक दुकानें लगीं और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एसडीओपी आनंद राय ने मेले का निरीक्षण किया, साथ ही थाना प्रभारी नरेंद्र कुशवाह ने अपने आरक्षकों को मेले में जगह जगह तैनात किया है। साथ ही एसडीएम अनुपम शर्मा ने राजस्व विभाग के आर.आई., पटवारी, कोटवारों की ड्यूटी लगाकर जगह जगह तैनात किए। नगर परिषद सीएमओ राधा शर्मा और नगर परिषद अध्यक्ष रश्मि नेपाल वर्मा ने आरआई वीरू वर्मा, योगेश गुप्ता सहित नगर परिषद कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर लोगों को मंदिर तक जाने वाले रास्ते पर सावधानीपूर्वक ऊपर जाने की समझाइश दी।
इतिहास और आस्था

केदारेश्वर धाम का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। जनश्रुति के अनुसार, संत श्री मंगलदास महाराज को स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन दिए। राजा नवल खांडेराव द्वारा खुदाई के बाद शिवलिंग प्रकट हुआ और मंदिर का निर्माण कराया गया।
गुप्त गंगा और गौमुख

मंदिर परिसर में स्थित ‘गुप्त गंगा’ के जल से श्रद्धालु अभिषेक करते हैं। मंदिर की तीसरी मंजिल पर बना गौमुख लगातार वर्षो से जल प्रदान कर रहा है, जिसे स्थानीय लोग औषधीय गुणों से भरपूर मानते हैं।

रहस्यमयी ध्वनियां और मनोकामना पूर्ति

पुजारी पंडित रामनिवास भार्गव के अनुसार, कई भक्तों ने घंटियों की आवाज, घोड़ों के पैरों की टाप और आरती की गूंज जैसी रहस्यमयी ध्वनियों का अनुभव किया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां की गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक भंडार

चारों ओर फैले जंगलों में दुर्लभ जड़ी-बूटियों का भंडार मौजूद है, जो स्वास्थ्य लाभ और बीमारियों के उपचार में उपयोगी मानी जाती हैं। आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम समेटे केदारेश्वर धाम, महाशिवरात्रि के अवसर पर एक बार फिर भक्तिमय माहौल में डूबा।

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