बांसवाड़ा-कहते है भक्ति और शक्ति से बढ़कर कुछ भी नहीं है। मन में भक्ति का भाव और मनोबल की शक्ति ने 19 वर्ष की उम्र में 9 साल पहले ही अपने माता-पिता का घर छोड़ चुकी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के शाहपुर की रहने वाली शिवानी अब बांसवाड़ा में सांसारिक जीवन त्याग कर दीक्षा लेंगी। अब उनका सांसारिक जीवन से कोई वास्ता नहीं रहेगा। शिवानी बताती है कि 2003 में ही यह निश्चय कर लिया था कि मुझे सेवा करनी हैं। लेकिन तब मुझे कोई समझ नहीं थी। इसके कुछ समय बाद साध्वी सुभूषणमति माताजी मिली तो उनकी शिष्या बनना चाहा। लेकिन माता-पिता को यह बात अच्छी नहीं लगी। इसलिए कई बार घर से निकलने का प्रयास किया, लेकिन घर वालों ने निकलने नहीं दिया। काफी परेशानियां उठानी पड़ी। जैसे ही महीने भर की छुट्टी मिलती तो मैं माताजी के यहां चली जाती थी। एक दिन भी में बिना भक्ति के नहीं गवाती थी। फिर मुझे तीन साल पढ़ाया गया और बीए करने के बाद 2006 में तीन साल की फिजियो थैरेपी की डिग्री लेकर फिजियो थैरेपिस्ट बनी। लेकिन मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता था। आखिर में मैने वैराग्य और भक्ति की राह पर चलने का निर्णय लिया।
2009 से ही घर छोड़ दिया
शिवानी के घर वाले मानने के बाद शिवानी ने दीक्षा से पूर्व ही घर छोड़ दिया। शिवानी ने 2009 से घर की चौखट पर पैर नहीं रखा। बताया कि मैंने ताे 9 साल पहले ही घर छोड़ा तो उसके साथ सबकुछ छोड़ दिया। घर में एक बहन और दो भाई है। माता की सेवा के बाद अब मैने पूर्ण रूप से ये फैसला ले लिया कि मुझे दीक्षा लेकर सांसारिक जीवन से ही नाता छोड़ देना चाहिए। ताकि भगवान और गुरु की भक्ति में कोई समस्या उत्पन्न ना हो। इसलिए अब दीक्षा ले रही हूं और मेरे माता-पिता भी खुश है। अब उनकी उपस्थिति में मेरी गोद भराई की गई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
2009 से ही घर छोड़ दिया
शिवानी के घर वाले मानने के बाद शिवानी ने दीक्षा से पूर्व ही घर छोड़ दिया। शिवानी ने 2009 से घर की चौखट पर पैर नहीं रखा। बताया कि मैंने ताे 9 साल पहले ही घर छोड़ा तो उसके साथ सबकुछ छोड़ दिया। घर में एक बहन और दो भाई है। माता की सेवा के बाद अब मैने पूर्ण रूप से ये फैसला ले लिया कि मुझे दीक्षा लेकर सांसारिक जीवन से ही नाता छोड़ देना चाहिए। ताकि भगवान और गुरु की भक्ति में कोई समस्या उत्पन्न ना हो। इसलिए अब दीक्षा ले रही हूं और मेरे माता-पिता भी खुश है। अब उनकी उपस्थिति में मेरी गोद भराई की गई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
