पानीगाव-मरने से पहले अपनी बुराइयों को मरने का मौका जरूर देना। इससे पहले कि लोग आपकी अस्थियां बटोरे एक बार अपनी आस्था को जरूर बटोर लेना। जिसने अपनी आस्था को बटोर लिया वह भवसागर तर गया।
ये प्रेरणादायी उद्गार गांव के दिगंबर जैन मंदिर में अल्प प्रवास पर ससंघ पधारे आचार्यश्री अनुभवसागरजी महाराज ने धर्म सभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जिसने अपनी आस्था को बटोर लिया उसकी अस्थियों को बटोरने वाला व्यक्ति भी भावित हो जाता है। जिसकी आस्था मर चुकी है उसको संसार में कोई याद नहीं करता। पैसा वैश्या भी कमा लेती है।
पेट भिखारी भी भर लेते हैं। परिवार का पालन-पोषण पशु-पक्षी भी कर लेते हैं। आप कौन सा नया काम कर रहे हैं। यदि हम सिर्फ पैसा बनाने में लगे हैं। परिवार के पालन-पोषण में लगे हैं और पेट भरने में लगे हैं तो वैश्या, भिखारी और पशु-पक्षी से श्रेष्ठ हमारी स्थिति नहीं है। यदि मनुष्य इन सभी से ऊपर उठकर अपनी आत्मा के विकास के बारे में थोड़ा भी चिंतन कर ले तो वह भवसागर से तर जाता है। दोपहर बाद आचार्यश्री ने ससंघ पुष्पगिरि तीर्थ की और विहार किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
