कागदीपुरा -संयम के मार्ग पर चलने वाला मनुष्य भाग्यशाली होता है। संसार के सुख को त्याग कर धर्म के मार्ग पर चलना कठिन कार्य जरूर है, परंतु कल्याणकारी रास्ता है। जिस मानव की पुण्य वाणी जागती है, वही संयम और त्याग के रास्ते पर चलता है। प्यासे को प्यास बुझाने के लिए कुएं के पास जाना पड़ता है उसी तरह आत्मा की प्यास बुझाने के लिए संतों की शरण में जाना पड़ता है। इसी कारण गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को निष्काम भाव से बिना किसी आशक्ति के ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य का पालन करने का उपदेश दिया है।
जो व्यक्ति धर्म कार्य करता है वह धन के लिए कभी परेशान नहीं रहता। क्याेंकि धन धर्म से प्राप्त होता है। जो व्यक्ति धर्म के कार्य करता है, भगवान व गुरुओं की भक्ति करता है, दीन दुखियों की सेवा करता है वह अपने जीवन में पुण्य का बंध करता है। वही पुण्य संपूर्ण सुख-सुविधाएं प्रदान करता है।
यह बात दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र छोटा महावीरजी कागदीपुरा में विराजित आचार्य प्रणाम सागरजी महाराज ने मंगलवार काे धर्मसभा में कही। आचार्य श्री ने आगे कहा जीवन में धर्म के कार्य तो हो लेकिन वह मात्र लौकिक सुख-सुविधाओं को पाने के लिए न हो। अपितु सच्चे सुख (मोक्ष) पाने के लिए होना चाहिए। क्योंकि जो व्यक्ति मोक्ष रूपी उत्कृष्ट सुख को प्राप्त करने की भावना रखता है उसे सांसारिक सुख व सुविधाएं सहज ही प्राप्त हो जाती हैं। इसलिए जीवन में धर्म के कार्य करें और परमार्थ की भावना रखें। जिससे कल्याण हो जाए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
