तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर जी महाराज ऐतिहासिक वर्षायोग


रामगंजमंडी -संतो के संत महातपस्वी आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज संघ का वर्षायोग सन 1991 मे रामगंजमंडी नगर को मिला जो नगर के लिये कभी न भुलाये  जाने पल है उनका अनुशासन उनका संयम उनका त्याग देखते  बनता था 

 संस्मरण

 1991 मे वर्षायोग का समय आने कॉ था  समाजजन श्रेष्ठीजन वर्षायोग नगर मे हो इसके लिये उत्साहित थे सभी ने सहमति के साथ सुसनेर मध्यप्रदेश तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज को श्रीफल भेट करते हुये वर्षायोग  हेतु निवेदन किया  आचार्य भगवन ने नगर के निवेदन को सुना और  शायद नगर का पुण्य  हिलोरे मार रहा था आचार्य भगवन ने रामगंजमंडी की विनती को स्वीकार किया तब  श्रेष्ठी जन ने कहा  आचार्य श्री हम कल पूरी  व्यवस्था के साथ आयेगे पर गुरुवर तो गुरुवर है  उन्होने कहा अभी रामगंजमंडी की और विहार सचमुच यह किसी अतिशय से कम नहीं 

    ऐतिहासिक आगवानी 

 इन्द्र देव भी मेहरबान रहे 

 आचार्य  संघ की जो आगवानी हुयी वह गदगद कर देने वाली थी मेरी उम्र छोटी थीपर  वह  द्रश्य आज भी  मेरी स्म्रति पर अंकित है जैसे नगर की सीमा पर आचार्य भगवन की संघ सहित कमल फिलिंग पर  आगवानी की गयी वही इन पलो मे इन्द्र देव भी जमकर आये नगर मे  तोरण द्वार शत नमन नमन  के बेनरो से  अटा था सम्पूर्ण नगर दुल्हन की तरह  सजा हुआ था  ऐसा समवशरण देख हर कोही  अभिभूत था 

    महती तप आराधना 

 आचार्य भगवन  तप त्याग की प्रतिमूर्ति थे  उनके तप का ही प्रभाव रहा अनेकों तपस्या हुयी दस उपवास 5 उपवास 3 उपवास आदि जितनी तपस्या  उस समय हुयी शायद उतनी तपस्या नगर के इतिहास मे देखने को नहीं मिली 

     विधान सम्पन्न 

 आचार्य भगवन की निश्रा मे नगर मे अनेकों विधान सम्पन्न हुये जिसमे सिद्धचक्र महामण्डल विधान  भी हुआ  जो उल्लास उमंग और भक्ति के साथ हुआ 

   दीक्षा सम्पन्न

   आचार्य भगवन के द्वारा 18 NOV 1991 को रामगंजमंडी का कृषि उपज मंडी यार्ड इसका साक्षी है जब कठियावाड गुजरात के बसंतीलाल जी ब्रह्मचारी जी को दिगंबरतव दीक्षा दी गयी और उन्हे मुनि श्री  108 शुभसागर जी महाराज नाम दिया  गया दीक्षा से दो दिन पूर्व उनकी नगर मै भव्य बिंदोरी भी निकाली गयी

 दीक्षा दिवस व पिच्छिका परिवर्तन 

  19 NOV 1991 को आपका भव्यता के साथ दीक्षा महोत्सव मनाया गया कृषि उपज मंडी यार्ड इसका साक्षी बना और  संघ सहित पिच्छिका परिवर्तन हुआ 

  नगर का चातुर्मास  उन्होने सर्वोतम चातुर्मास मे एक बताया 

     रामगंजमंडी नगर मे जो वर्षायोग मे प्रभावना हुयी और जो कुशलता से सम्पन्न हूआ उसे आचार्य भगवन ने अपने सर्वोतम चातुर्मास मे एक बताया  जों नगर के लिए किसी गौरव से कम नहीं 

        तप साधना 

 आपकी साधना को मुझे नजदीक से देखने को मिला जो  मेरे लिये किसी पुण्य से कम नहीं एक छोटे से पटिये पर घंटो साधना करना उसी पर विश्राम करना सचमुच कोई बिरला साधक ही कर सकता है 

  आजीवन अन्न त्याग

 आपका आजीवन अन्न का त्याग रहा और एक आहार एक उपवास की साधना करते थे  वही जीवन के अंतिम क्षणो मे तो केवल छाछ और पानी लिया करते थे धन्य है ऐसे साधक

      वात्सल्य की प्रतिमूर्ति

 रामगंजमंडी नगर पर उनका आशीष निरंतर रहा  जब नगर वासी  उंनके दर्शन को जाता वह मुस्कान देते और आशीष प्रदान करते और श्रेष्ठी जनो से नगर के वर्षायोग की सराहना करते है 

    तुम विश्व धर्म के सूरज हो

  तप त्याग की अद्भुत मूरत हो 

है धन्य  धन्य महिमा तेरी तम हरने वाले सूरज हो 

      एक रिपोर्ट अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी

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