निस्वार्थ सेवा-भक्ति भगवान तक पहुंच जाती है: आचार्यश्री



सगरा-वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज कड़ाके की ठंड में जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का विहार कर रहे हैं। और ग्रामीण जनों को मांस मदिरा जैसे व्यसनों के पाप से अवगत कराते हुए इनका त्याग का संकल्प दिला रहे हैं। नोहटा से विहार के बाद आचार्य श्री चंडी चोपड़ा पहुंचे थे वहीं सगरा ग्राम में प्रवचन हुए। बनवार में मंगल आगवानी हुई। 21 दिसंबर को बनवार में मंगल प्रवचन होंगे।
सगरा ग्राम में वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने कहा अज्ञान का अंधकार जो मिटाए उसी को गुरु कहते हैं। जो सच्चाई का पथ दिखलाए उसे गुरु कहते हैं। ब्रह्मा विष्णु और महेश गुरुदेव में समाहित हैं। जो इन तीनों से मिलाए उसे गुरु कहते हैं। जिस प्रकार आकाश से गिरा हुआ जल किसी न किसी रास्ते से होकर समुद्र में पहुंच जाता है उसी प्रकार निस्वार्थ भाव से की गई सेवा भक्ति एवं प्रार्थना किसी न किसी रास्ते से भगवान तक पहुंच जाती है। आचार्य श्री ने कहा कि अपने भविष्य की चिंता करना चाहिए, लेकिन इतनी नहीं कि जिंदगी तमाम हो जाए। गुरुजनों का कभी उपकार नहीं भूलना चाहिए क्योंकि गुरु आशीष से ही नैया पार होती है। विद्वान वही है जो दूसरों की अच्छाइयां देखता है बुराइयां नहीं और अपनी बुराइयां देखकर उन्हें दूर करने की कोशिश करता है। आचार्य श्री ने कहा कि आवाज से आवाज नहीं मिटती है, गुस्सा से गुस्सा नहीं मिटता है। चिंता से चिंता नहीं मिलती, कषाय करने से कषाय नहीं मिटती। दूसरों को तकलीफ देने से तकलीफ नहीं मिटती। इसलिए इन सभी कार्यों को छोड़ देना चाहिए। मेहनत का फल और समस्या का हल अवश्य मिलेगा। गुरु के पास बैठकर देखो तो दो पल। आचार्य श्री ने कहा आत्मा संवेदनशील चैतन्य पिंड है हर प्राणी को सुख दुख दर्द पीड़ा का एहसास होता है। स्वयं को दर्द महसूस होना जीवित होने का प्रमाण है और दूसरों का दर्द महसूस होना इंसानियत होने का प्रमाण है। आचार्य श्री का संघ सहित बनवार के लिए विहार हुआ। जहां रात्रि विश्राम के बाद 21 दिसंबर को आहार एवं प्रवचन बनवार में होंगे।
         संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.